भोपाल। पर्यावरण अभियांत्रिकी मध्य प्रदेश के लोग बड़ी शान से कहते हैं कि डॉ. स्नेह गौतम हमारे प्रदेश से हैं। मंदसौर के लोगों की आखों में तो चमक आ जाती है जब वो बताते हैं कि डॉ. स्नेह गौतम उनके पड़ौसी हैं, स्कूल में पढ़ते थे, इस ग्राउंड में खेलते थे। डॉ. स्नेह गौतम आज सफलता का दूसरा नाम है लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब इंजीनियरिंग कॉलेज ने उन्हे एडमिशन देने से मना कर दिया था।
इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर ने सम्मानित किया
डॉ. स्नेह गौतम को हाल ही में पर्यावरण अभियांत्रिकी के क्षेत्र में बेहतर योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। सम्मान इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर (इंडिया) ने बैंगलोर में किया। इससे पहले वे तीन बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मानित हो चुके हैं। मंदसौर के डॉ. स्नेह गौतम ने प्रदेश के बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश का सपना लेकर मैथ्स से 12वीं की पढ़ाई की। फर्स्ट डिविजन से 12वीं पास करने के बाद भी पीईटी में उन्हें कम अंक मिले। इसके चलते उन्हें प्रदेश के बेहतर शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज ने उन्हे एडमिशन नहीं दिया। अक्सर होता यह है कि ऐसी स्थिति में स्टूडेंट के माथे पर एक दाग लगा दिया जाता है और उसे एवरेज मानकर किसी प्राइवेट कॉलेज में एडमिशन दिया जाता है परंतु स्नेह के पिता ने ऐसा नहीं किया।
पिता की सलाह काम आई
पिता व सेवानिवृत्त प्रोफेसर एचजी गौतम की सलाह से उन्होंने पीजी कॉलेज में जियोलॉजी विषय से बीएससी कर गोल्ड मेडल प्राप्त किया। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया बरकले यूएसए एवं इनक्लेन ट्रस्ट इंटरनेशनल में पर्यावरण स्वास्थ्य वैज्ञानिक के रूप में काम किया। उन्हें मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलाॅजी गवर्नमेंट ऑफ ताइवान से पोस्ट डॉक्टरेट फेलोशिप मिली, जिससे उन्होंने पोस्ट डॉक्टरेट किया। डॉ. गौतम पर्यावरण अभियांत्रिकी के क्षेत्र में विश्व के बड़े वैज्ञानिकों में से हैं।
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