कैलाश पर्वत की ऊंचाई 6600 मीटर से अधिक है, जो दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट से लगभग 2200 मीटर कम है। माउंट एवरेस्ट पर अपने देश का झंडा गाढ़ने वालों की संख्या काफी है परंतु आज तक कोई भी पर्वतारोही कैलाश पर्वत के शिखर तक नहीं पहुंच पाया। प्रश्न यह है कि आखिर ऐसा क्यों नहीं हुआ। क्या कभी कोई गया ही नहीं या फिर आज भी नंदी बाबा पहरा दे रहे हैं और किसी को साधना में लीन भगवान शिव तक पहुंचने नहीं देते। आइए जानते हैं विज्ञान और अंधविश्वास और धार्मिक मान्यताओं के बीच उलझी इस गुत्थी को सुलझाने की कितनी बार कोशिश की गई।
कैलाश पर्वत और कैलाश क्षेत्र पर दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने रिसर्च की है। इस पर रिसर्च करने वाले ह्यूरतलीज ने कैलाश पर्वत पर चढ़ने को असंभव बताया है। इसके अलावा एक दूसरे पर्वतारोही कर्नल आर.सी. विल्सन ने बताया कि, 'जैसे ही मुझे लगा कि मैं एक सीधे रास्ते से कैलाश पर्वत के शिखर पर चढ़ सकता हूं, भयानक बर्फबारी ने रास्ता रोक दिया और चढ़ाई को असंभव बना दिया।'
कई पर्वतारोहियों का दावा है कि कैलाश पर्वत पर चढ़ना असंभव है। रूस के एक पर्वतारोही, सरगे सिस्टियाकोव ने बताया कि, 'जब मैं पर्वत के बिल्कुल पास पहुंच गया तो मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा। मैं उस पर्वत के बिल्कुल सामने था, जिस पर आज तक कोई नहीं चढ़ सका। अचानक मुझे बहुत कमजोरी महसूस होने लगी और मन में ये ख्याल आने लगा कि मुझे यहां और नहीं रुकना चाहिए। उसके बाद जैसे-जैसे हम नीचे आते गए, मन हल्का होता गया।'
कैलाश पर्वत पर चढ़ने की आखिरी कोशिश लगभग 17 साल पहले साल 2001 में की गई थी। जब चीन ने स्पेन की एक टीम को कैलाश पर्वत पर चढ़ने की अनुमति दी थी लेकिन दुनियाभर के लोगों को मानना है कि कैलाश पर्वत एक पवित्र स्थान है। इसलिए इस पर किसी को भी चढ़ाई नहीं करने देना चाहिए, जिसके बाद से कैलाश पर्वत की चढ़ाई पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई।
कैलाश पर्वत का महत्व इसकी ऊंचाई की वजह से नहीं, बल्कि इसके विशेष आकार की वजह से है। माना जाता है कि कैलाश पर्वत आकार चौमुखी दिशा बताने वाले कम्पास की तरह है। कैलाश पर्वत को धरती का केंद्र माना जाता है।
रूस के वैज्ञानिकों की स्टडी के मुताबिक, कैलाश मानव निर्मित पिरामिड हो सकता है, जिसका निर्माण किसी दैवीय शक्ति वाले व्यक्ति ने किया होगा। एक दूसरी स्टडी के मुताबिक, कैलाश पर्वत ही वह एक्सिस मुंडी है, जिसे कॉस्मिक एक्सिस, वर्ल्ड एक्सिस या वर्ल्ड पिलर कहा जाता है। बता दें, एक्सिस मुंडी लैटिन का शब्द है, जिसका मतलब ब्रह्मांड का केंद्र होता है। इसके अलावा अलग-अलग धर्म में अलग-अलग जगहों को धरती का केंद्र भी माना जाता है।
कैलाश पर्वत को धरती का केंद्र मानने की कई वजह है। माना जाता है कि कैलाश पर्वत में पृथ्वी का भौगोलिक केंद्र है। दूसरा, यहां आसमान और धरती का मिलन होता है। तीसरा, यहां चारों दिशाओं का केंद्र बिंदु है। चौथा, ईश्वर और उनकी बनाई सृष्टि के बीच संवाद का केंद्र बिंदु होना है।
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