भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज विधानसभा में कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता और उत्कृष्टता के लिए राज्य सरकार एक उच्च स्तरीय समिति गठित करेगी। श्री कमलनाथ ने प्रश्नकाल के दौरान विधायक विनय सक्सेना के पूरक प्रश्नों के दौरान कहा कि यह समिति उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत शासकीय और अर्धशासकीय संस्थाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थी शिक्षा के मापदंडों पर उत्कृष्ट हों, यह सुनिश्चित करेगी।
श्री कमलनाथ ने कहा कि उनका व्यक्तिगत अनुभव रहा है कि राज्य शिक्षण के क्षेत्र में गुणवत्ता का बेहद अभाव है। इसके कारण हमारे बच्चे विभिन्न संस्थानों में नौकरी पाने से वंचित रह जाते हैं। गांवों से बच्चे पढ़ने शहर में आते हैं, लेकिन शिक्षा का स्तर बेहतर नहीं होने के कारण उन्हें अवसर नहीं मिल पाता है। इस कारण वे न शहर के रह पाते हैं। और न ही गांव के।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में बनायी जाने वाली समिति इन सब बिंदुओं को ध्यान में रखेगी और विपक्ष के सदस्यों के सुझाव भी आमंत्रित करेगी। मूलप्रश्नकर्ता श्री सक्सेना ने नर्सिंग कालेजों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि हिमाचल प्रदेश ने राज्य के नर्सिंग कालेजों में पढ़े छात्रों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि नर्सिंग कालेजों को मान्यता देने में भ्रष्टाचार हुआ है और इनकी जांच करायी जाना चाहिए। जवाब में चिकित्सा शिक्षा मंत्री विजयलक्ष्मी साधौ ने कहा कि मान्यता देने का काम पहले अखिल भारतीय परिषद करती थी, लेकिन 2017 में उच्च न्यायालय के आदेश के बाद ये कार्य मध्यप्रदेश की परिषद करने लगी। अनियमितताओं के संदर्भ में उन्होंने एक उच्च स्तरीय समिति से पूरे मामले की जांच कराने की घोषणा की।
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