ख़िलाफ़त उर्दू का एक शब्द हैं और ज्यादातर लोग इसका उपयोग 'विरोध करना' के तौर पर लेते हैं। आपने अक्सर टीवी चैनलों में सुना होगा 'नेताजी नंबर 2 सदन के भीतर नेताजी नंबर 1 की ख़िलाफ़त में खड़े हो गए।' या फिर अखबारों में पढ़ा होगा। 'लाखों मजदूर सरकार की ख़िलाफ़त के लिए लामबंद' प्रश्न यह है कि क्या 'ख़िलाफ़त' शब्द का अर्थ 'विरोध करना' होता है या इसका कुछ और ही अर्थ है और मीडिया ने 'ख़िलाफ़त' के गुड़ का गोबर कर डाला है।
विरोध नहीं विचारधारा को खिलाफ़त कहते हैं
मुहम्मद साहब की मृत्यु के बाद इस्लाम के प्रमुख को खलीफ़ा कहते थे। इस विचारधारा को खिलाफ़त कहा जाता है। प्रथम चार खलीफाओं को राशिदुन कहते हैं। उम्मयद, अब्बासी और फ़ातिमी खलीफा क्रमशः दमिश्क, बग़दाद और काहिरा से शासन करते थे। इसके बाद उस्मानी (ऑटोमन तुर्क) खिलाफ़त आया।
मुहम्मद साहब के नेतृत्व में अरब बहुत शक्तिशाली हो गए थे। उन्होंने एक बड़े साम्राज्य पर अधिकार कर लिया था जो इससे पहले अरबी इतिहास में शायद ही किसी ने किया हो। खलीफ़ा बनने का अर्थ था - इतने बड़े साम्राज्य का मालिक और खिलाफ़त यानी इस विशाल साम्राज्य की विचारधारा।
तो फिर खिलाफ़त को 'विरोध करना' क्यों समझा गया, क्या मीडिया मूर्ख है
1919-1922 भारत में मुसलमानों द्वारा राजनीतिक-धार्मिक आन्दोलन शुरू किया गया था। इस आंदोलन का नाम था 'ख़िलाफ़त आन्दोलन' इस आन्दोलन का उद्देश्य (सुन्नी) इस्लाम के मुखिया माने जाने वाले तुर्की के ख़लीफ़ा के पद की पुन:स्थापना कराने के लिये अंग्रेज़ों पर दबाव बनाना था। इस तरह सरकार पर दवाब बनाने के लिए किए जाने वाले आंदोलन को 'ख़िलाफ़त आन्दोलन' समझा गया और 'ख़िलाफ़त' का अर्थ समझा गया 'विरोध करना'
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