नई दिल्ली। देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी की 23 जून को हुई सीईटी निरस्त कर दी गई है। कुलपति पद से डॉ. नरेंद्र धाकड़ को भी हटा दिया गया। मंगलवार को यूनिवर्सिटी के ईएमआरसी पहुंचे उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने आयुक्त उच्च शिक्षा राघवेंद्र सिंह और कुलपति प्रो. रेणु जैन की मौजूदगी में सीईटी पर भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोप लगाया है। चौंकाने वाली बात यह है कि मंत्री ने ना तो इसकी जांच के लिए कोई समिति बनाई और ना ही मंच से जांच कराने का ऐलान किया।
बोले कि इस बार तो सीईटी में भ्रष्टाचार और अनियमितता हुई, इसलिए परीक्षा निरस्त ही करना पड़ी, लेकिन आगे से ऐसा न हो, इसकी तैयारी अभी से करना चाहिए। अगले साल सीईटी पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। हालांकि पटवारी यह भूल गए कि अभी तक सीईटी में भ्रष्टाचार का कोई सीधा आरोप नहीं लगा। यही नहीं सीईटी निरस्त करने के पीछे भी परीक्षा में देरी और लिंक नहीं खुलने की शिकायत को ही वजह माना गया। ऐसे में इस आरोप के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है।
मॉडल यूनिवर्सिटी के दर्जे पर गोलमोल जवाब
उच्च शिक्षा मंत्री ने डीएवीवी को मॉडल यूनिवर्सिटी का दर्जा दिए जाने पर सीधे तौर पर कोई घोषणा नहीं की। उन्होंने कहा दर्जा देना अलग बात है और साख बनाना अलग है। हम चाहते हैं कि ऐसी साख बने की देश के किसी भी शहर का छात्र यहां एडमिशन के लिए आना चाहे। उस पर काम करेंगे। दरअसल इस दर्जे के साथ ही राज्य शासन को यूनिवर्सिटी को विशेष फंड भी देगा पड़ेगा। यही कारण है कि फिलहाल शासन ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
पटवारी ने ईएमआरसी में कुलपति प्रो. रेणु जैन, महापौर मालिनी गौड़ की मौजूदगी में कहा हम प्रोफेसरों की हर मदद को तैयार हैं। सब मिलकर नैक से ए डबल प्लस ग्रेड लाने के लिए प्रयास करें। प्रो. आशुतोष मिश्रा, प्रो. एके सिंह, प्रो. विजय बाबू गुप्ता, प्रो. बीके त्रिपाठी आदि मौजूद थे।
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