भारतीय टीम विश्व कप के सेमीफाइनल मैच को हारकर विश्व कप से बाहर हो गई। भारत की हार के बाद भारतीय टीम का स्पॉन्सर ओप्पो उससे अलग होने का निर्णय ले सकता है। जो खबरें मिल रही हैं उससे यही कयास लगाए जा रहे हैं कि चीनी स्मार्टफोन कंपनी भारत से डील खत्म करने की तैयारी में है तो ऐसे में भारतीय टीम को किसी दूसरी कंपनी से डील करनी होगी। ऐसे में अगले साल भारतीय टीम की जर्सी पर किसी और स्पॉन्सर का नाम हो सकता है। इस मामले में ओप्पो ने बीसीसीआई से भी बात की है और वह किसी नए ब्रांड को ढूंढ़ने जा रहे हैं।
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ओप्पो ने मार्च 2017 में भारतीय टीम की स्पॉन्सरशिप ली थी। उस समय हंगामा भी हुआ था, क्योंकि भारत और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा है। यह भी खबर मिली है कि एक डिजीटल टेक स्टार्ट अप ने ओप्पो से स्पॉन्सरशिप हासिल करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। ऐसे में भारतीय टीम की जर्सी पर ओप्पो की जगह किसी और का नाम सकता है। हालांकि अभी तक अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
ओप्पो ने मार्च, 2017 में 5 साल के लिए 1079 करोड़ में भारतीय टीम का स्पॉन्सर अधिकार हासिल किया था। उसने वीवो को पीछे छोड़कर यह अधिकार लिया था। वीवो ने 768 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी। ओप्पो बीसीसीआई को हर मैच के लिए 4.61 करोड़ रुपए देती है। जबकि आईसीसी या एशियन क्रिकेट काउंसिल के मैचों में यह रकम 1.56 करोड रुपए होती है।
बता दें कि इससे पहले सहारा इंडिया 2012-13 में हर मैच के हिसाब से बीसीसीआई को 3.34 करोड़ रुपये देती थी। सहारा के बाद भारतीय टीम की स्पॉन्सरशिप स्टार स्पोर्ट्स को मिल गई। बीसीसीआई ने बीच में सौदा तोड़ने पर भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान भी कर रखा है। लेकिन ओप्पो इससे बच सकता है, अगर वह इन्हीं शर्तों पर दूसरा ब्रांड ढूंढे तो।
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