मेहलक़ा अंसारी, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

सी.एम.एच.ओ. बुरहानपुर द्वारा अचानक शुक्रवार को डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी चिकित्सालय में संचालित नेत्र चिकित्सालय को बंद करने के तुग़लक़ी आदेश से मरीजों को हो रही परेशानियों के मद्देनज़र प्रदेश की पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) ने अस्पताल पहुंचकर चार-पांच वाहनों में मरीजों के साथ कलेक्टर निवास पहुंची और अचानक बंद किए गए नेत्र अस्पताल के के संबंध में कलेक्टर से चर्चा की। परिणाम स्वरूप कलेक्टर ने सी.एम.एच.ओ. डॉ. वर्मा को मोबाईल पर निर्देश दिए कि जो आदेश अस्पताल बंद करने का निकाला है उसे तत्काल निरस्त किया जाए तथा नेत्र अस्पताल को डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी चिकित्सालय में ही संचालित किया जाए।
श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) ने संवाददाता को बताया कि सी.एम.एच.ओ. का आदेश मानवता के खिलाफ है। सबसे पहले अगर नेत्र चिकित्सालय को जिला चिकित्सालय में स्थानांतरित किया जाना है तो पहले जिला चिकित्सालय में आंखाें के ऑपरेशन करने के लिए समुचित व्यवस्था की जाए। अचानक ही वर्तमान नेत्र चिकित्सालय को बंद करना बुरहानपुर के मरीजों एवं आमजनता के प्रति संवेदनहीनता है। सी.एम.एच.ओ. डॉ. वर्मा ने अपने आदेश में जो मध्यप्रदेश शासन के स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशों का हवाला दिया है वह सही नहीं है।
पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) ने कहा कि मध्यप्रदेश शासन के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट जी को मैं छात्र जीवन से जानती हूं। वे अस्पताल बंद करने जैसे असंवेदनशील निर्देश दे ही नहीं सकते। पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस दीदी का उक्त नेत्र चिकित्सालय के संबंध में प्रयास के साथ यह बताना भी नितांत आवश्यक है कि आप के मौखिक निर्देश के पालन में शासकीय नेहरू चिकित्सालय को शहर से जिला चिकित्सालय में शिफ्ट किया गया था। शिफ्टिंग के बाद से नगर की जनता बहुत परेशानी में है। ज़िला चिकित्सालय में जहां प्रर्याप्त बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। वहीं जनता को अनेकों व्यवहारिक कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ रहा है। एक जागरूक नेता की हैसियत से व्यापक जनहित में एवं जनभावनाओं के अनुरूप अपने पूर्व निर्णय पर पुनर्विचार कर माननीय महोदया अगर इस ओर भी ध्यान आकर्षित करके शासकीय नेहरू चिकित्सालय को पुनर्जीवित करवाने की पहल करें तो जनता के दिल और दिमाग में हमारी अपनी दीदी के प्रति सम्मान बढ़ेगा, यह जनता की मांग है। कम लिखे को ज़्यादा समझकर कार्यवाही करने कराने में ही दीदी का उज्जवल राजनैतिक भविष्य छुपा है।
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