भोपाल। मुख्यमंत्री कमलनाथ के रिश्तेदारों की उज्जैन यात्रा सुर्खियों में आ गई है। नियमानुसार मंत्री या मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों के लिए प्रोटोकॉल के तहत कोई सुरक्षा नहीं दी जाती परंतु उज्जैन में सरकारी काफिला उनकी सेवा में इस तरह लगा रहा मानो खुद मुख्यमंत्री ही आए हैं।
मामला मंगलवार का बताया जा रहा है जब प्रदेश के मुखिया कमलनाथ के भांजे और रिश्तेदारों के प्रोटोकॉल में उज्जैन के प्रशासनिक अमले ने पूरी ताकत झोंक दी। प्रशासनिक अमले को इन रिश्तेदारों के लिए प्रोटोकॉल का पालन करने से ज्यादा शायद सत्ताधारियों द्वारा कार्रवाई का डर सता रहा होगा इसीलिए तो महाकाल का दर्शन करने आए सीएम के भांजे और उनके परिवार की आवभगत में 6 से अधिक पुलिस और प्रशासनिक वाहनों का अमला साथ में लगा दिया।
वीआईपी मूवमेंट की तर्ज पर इन रिश्तेदारों को उज्जैन भ्रमण करवाया गया और सारे दिन सरकारी मशीनरी इनके आगे-पीछे घूमते रही। यहां इनके काफिले में तीन पुलिस वाहन, दो प्रशासनिक वाहन, एक एंबुलेंस सहित अन्य वाहन थे। मंगलनाथ में भात पूजा के बाद ये सभी महाकाल मंदिर पहुंचे। यहां करीब आधे घंटे तक पूजा-अभिषेक किया। इसके बाद वे उज्जैन से रवाना हुए।
शासकीय नियमों के अनुसार ये रिश्तेदार प्रोटोकॉल के किसी भी दायरे में नहीं आते। ना ही इन्हें वीआईपी सुविधा दिए जाने का कोई प्रावधान है। मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों को मिले सरकारी प्रोटोकॉल के मामले में बीजेपी ने कांग्रेस पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष रामेश्वर शर्मा ने कहा कि सत्ता का नशा कांग्रेस सरकार में साफ दिख रहा है। अस्पतालों में भले ही डॉक्टर ना हो लेकिन रिश्तेदारों की सेवा में एम्बुलेंस और डॉक्टर लगा दिए। थानों में टीआई भले ही ना हो लेकिन रिश्तेदारों की सुरक्षा में पुलिसवालों को ज़रूर लगाएंगे।
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