भोपाल। गोविंदपुरा पुलिस ने 12 साल के बच्चे की करंट से मौत के मामले में बिजली कंपनी के तत्कालीन असिस्टेंट इंजीनियर और लाइनमैन को लापरवाही बरतने का आरोपी बनाया है। पुलिस इस मामले की जांच को फाइल कर ठंडे बस्ते में डाल चुकी थी।
बच्चे के परिवार ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission) से शिकायत की। आयोग के दखल के बाद नए सिरे से हुई जांच के बाद पुलिस ने ये कार्रवाई की है। संभवत: भोपाल का ये पहला मामला है, जिसमें किसी असिस्टेंट इंजीनियर को करंट लगने के लिए लापरवाह माना गया है। ये हादसा पंचपीर नगर निवासी 12 वर्षीय राज (RAJ) पिता प्रेमचंद्र मकरध्वज (Premchandra Makardhavaj) के साथ हुआ था। नौ अप्रैल 2017 को वह घर के पास खेल रहा था। तभी उसकी बॉल पास बनी एक पुलिया में चली गई। राज अपनी बॉल उठाने गया और बिजली के तार की चपेट में आ गया। करंट लगने से मासूम की मौत हो गई। गोविंदपुरा पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। उस दौरान जांच में किसी को आरोपी न मानते हुए पुलिस ने मर्ग जांच फाइल कर ठंडे बस्ते में डाल दी।
इससे मायूस परिजनों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से शिकायत की। आयोग ने अपने स्तर पर की गई जांच में तत्कालीन एई और लाइनमैन को जिम्मेदार माना। मानवाधिकार आयोग के दखल के बाद पुलिस ने नए सिरे से इस मामले में जांच की।
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