अकाल पीड़ितों की सहायता में जुटें कार्यकर्ता: संजय गरुड

नरेंद्र इंगले, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र की राजनीती में जामनेर को विधानसभा के उपसभापती के रुप में पहली बार वैभव बहाल करने वाली शख्सीयत का नाम है आचार्य श्री गजाननरावजी गरुड़। तहसील क्षेत्र के शेंदुर्नी समेत जिले के दुर्गम इलाकों में गरीबों को मुफ़्त शिक्षा मुहैय्या कराने हेतु उस समय आचार्य ने द एजुकेशन सेकेंडरी सोसायटी की नींव रखी। आज उन्हीं की बदौलत संस्था ने अपनी करीब 18 इकाईयों के माध्यम से हजारों छात्रों के जीवन को प्रकाशमान करने के क्रम को निरंतर प्रयासरत रखा है। आचार्य के बाद 1997 में संस्था की बागडोर उनके भतीजे श्री संजय गरुड ने संभाली। आजादी के बाद से अब तक शेंदुर्नी जिला परिषद गुट पर गरुड परिवार के लोकस्नेह के कारण लहराते कांग्रेस के तिरंगे की शान आज भी संजय गरुड के कुशल राजनीतिक प्रबंधन और व्यापक जनाधार के कारण राष्ट्रवादी कांग्रेस की शक्ल में बरकरार है। दादा की जन उपाधि से परिचित संजय गरुड़ आज जामनेर तहसील में मुख्य विपक्षी नेता के तौर पर आम लोगों की आवाज बनकर उभरे हैं। 2004 में विधानसभा के आम चुनाव में निर्दलिय प्रत्याशी के रुप में मैदान में उतरे संजय दादा को जनता ने 43 हजार वोट देकर अपना जननायक चुन लिया था। 2009 में कांग्रेस के तिकट पर लडने वाले दादा को 83 हजार वोट मिले लेकिन महज 7 हजार वोटों के अभाव से उन्हें हार का सामना करना पडा। इसी दौरान आम लोगों में दादा के व्यक्तीत्व को संघर्ष के प्रतिक के रुप में पहचाना जाने लगा। राष्ट्रीय कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रहते उन्होंने कांग्रेस को नवसंजिवनी देने का नित्य प्रयास किया। क्षेत्र की राजनीति में पनपे तत्कालिन हालातों के चलते 1995 का वह एक पडाव ऐसा भी रहा जो परिवर्तन की नजीर बना। उसी पडाव ने दादा के रुप में 2009 में करवट बदलने की कोशिश जरुर की जो असफ़ल रही। 2004 से अब तक 15 सालों में गरुड़ कि व्यक्तीरेखा ने जनता के बीच अपनी अलग छाप छोड़ी है जिसे बीते पांच सालों में उनके द्वारा किए गए जनांदोलनों ने लोगों को एक आश्वासक दिशा देने का काम किया। फडणवीस सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ़ बेखौफ़ बेबाक होकर बुलंदी से आवाज उठाने की अपनी शैली से गरुड़ आज लोगों के बीच निडर वक्ता व मजबुत नेता के रुप में पहचाने जाते हैं। कहा जाता है कि राजनीति में पर्याप्त संसाधनों का अभाव सशक्त विपक्ष की कमजोरी रहा है लेकिन इस मामले में गरुड ने कभी भी इसकी फिक्र नहीं की। प्रतिकुल परीस्थितियों में पदाधिकारियों के साथ पार्टी संगठन को मजबुती प्रदान करते जनसमस्याओं को लेकर वह सरकार का मुखर विरोध कर उन्होंने लोकतंत्र को मजबुती प्रदान की। उनके अंदर की प्रशासनिक खूबियों तथा सच्चे स्वभाव गुण में छिपी अनंत संभावनाओं के कारण 2019 की आगामी विधानसभा के लिए आज जनता और सभी वंचित तबकों की पहली और आखिरी पसंद केवल संजय गरुड़ बने हुए हैं।

दादा की जन्मदिवस कि पुर्वसंध्या पर संवाददाता द्वारा उन्हें फ़ोन पर बधायी देने के बाद आम जनता तथा पार्टी कार्यकर्ताओं को उनके द्वारा दिए गैर राजनितीक संदेश में उन्होंने कहा कि “आज सूबे के साथ पुरे तहसील की आवाम भीषण अकाल का सामना कर रही है. सैकड़ों गांवों में पानी के टैंकर चल रहे हैं ऐसे में सालगिरह का हर्ष मनाना मानवता के विपरीत है। मैं अपने सभी चाहने वालों से यही अनुरोध करता हूं कि मुझे बधाई देने के लिए फिजुल खर्ची न करें बल्कि अकाल पीड़ितों की सहायता के लिए आगे आएं। जरुरतमंद बच्चों को नोटबुक किताबें खरीद कर दें, अपने घरो के आंगन में पशु पक्षियों के लिए पीने के पानी तथा भोजन सामग्री का प्रबंध करें।



from New India Times http://bit.ly/2GImJwY