मकसूद अली, ब्यूरो चीफ, यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT:
यावतमाल के नेर शहर व आसपास में समाजसेवक प्रेमासाई महाराज ने सट्टा मटका के विरोध में पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाते हुए इसे बंद करने की मुहिम छेड़ रखी है। इस मुहिम से सट्टा मटका किंग का धंदा बंद तो नहीं हो सका लेकिन जहाँ ये सट्टा मटके की दुकानदारी खुलेआम चलती थी वहीं अब चोरी चुपके चलाना पड रहा है। इसी बात से आक्रोशित मटका किंग व भ्रष्ट अधिकारियों ने प्रेमासाई महाराज की बदनामी का सिलसिला शुरू कर दिया है। प्रेमासाई महाराज पर जितने भी केस में आरोप लगे हैं वो सब न्यायालय में विचाराधीन हैं इसके अलावा प्रेमासाई महाराज ने लोकसभा चुनाव के लिये जो नामांकन दाखिल किया था उसमें दी गई एफिडेविट में सारे केस की जनकारी दी गयी थी साथ ही चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार तीन बार पेपर में भी सारे केस की जनकारी प्रकाशित की गई थी। अब पुराने केस के बारे में खबर प्रकाशित करके समाज में प्रेमासाई महाराज की इज्जत को मालिन करने का काम किया जा रहा है जो की बहुत ही निंदनीय है क्योंकि जो केस न्यालाय में चल रहे हैं उसमें अभीतक न्यायालय ने दोषी करार नहीं दिया है तो फिर प्रेमासाई महाराज को गुन्हेगार या कुख्यात बोलने का अधिकार किसने दिया है?
आईए हम आपको लेके चलते हैं प्रेमासाई महाराज जी के प्रतिक्रिया की ओर….
(१) महाराज जी आपके बारे में पेपर में दो दिन से जो छप रहा है उस पर आपकी क्या राय है?
मैंने चुनाव के समय जो फार्म भरा है लोकसभा के लिये उसमें मैंने सभी केस का उल्लेख किया है। अफ्युडेविट में चुनाव आयोग के नियम अनुसार चुनाव से पहले मैंने पेपर में तीन बार सारे केस की जानकारी प्रकाशित भी की है। जब मैं खुद मेरे केस की जानकारी जनता को दिया है। जब तक कोई भी केस जो कोर्ट मे चल रहा है उसमें जब तक कोर्ट कोई निर्णय नहीं देता है तब तक कोई भी मुझे गुन्हेगार नहीं बोल सकता है। आरोप लगा है मुझ पर, आरोप तो झूठे भी लगते हैं, मुझे गुन्हेगार बोलने का अधिकार किसने दिया है इन्हें? ये सारे केस पुराने हैं ओर झूठे हैं ओर मैं जनता से यही केहना चाहता हूँ कि मेरे सामाजिक काम को देखें राजनीति में केस तो लगते ही रहते हैं। इस बदनामी के पीछे नेर मटका किंग है।
(2) आप इन बदनामी करने वालों के खीलाफ किया करना चाहेंगे?
हम लीगल तरिके से कोर्ट मे याचिका दायर कर रहे हैं। मेरी जिस पेपर ने बदनामी की है उनके खिलफ मानहानि का दावा कर रहे हैं क्योंकि कुछ न्युज पेपर ने मेरी प्रतिक्रिया लिये बगैर जनता के सामने एक तरफा न्युज छापकर जनता को भ्रमित किया है, ऐसे मामले में मेरी प्रतिक्रिया होनी जरुरी थी।
(3) यावतमाल पुलिस आपको पकडने आई थी, आपके नाम से वॉरंट निकला था इस बारे में क्या कहना है?
देखिए मेरा चुनाव 11 अप्रैल को खत्म हुआ है और मैं 12 तारीख को गुजरात के लिये रवाना हुआ हमारे भाजप के खासदार हैं उनके प्रचार के लिये और 19 तारीख को वॉरंट लेके पुलिस अगर आती है तो क्या मैं फरार हुआ, सोचने लायक बात है किस तरह मिर्च मसाला लगा कर जनता को दिखाया जा रहा है? आधी अधुरी बात जनता को दिखा रहे हैं। एक पेपर ने तो हद ही कर दी, उसमें छप के आया है कि मेरे घर की पुलिस ने तलाशी ली है।
(4) क्या आपसे कोई दुश्मनी है इन न्युज पेपर वालों की?
मेरी तो कोई दुश्मनी नहीं है लेकींन कुछ लोगों की मुझसे जो पैसों की अपेक्षा थी वह मैं पूरी नहीं कर पाया जिससे वह नाराज हैं। ऐसे लोगों को साथ में लेकर ये सट्टा मटका किंग मेरी बदनामी कर रहा है। कुछ लोगों को लगता है कि मेरे पास बहुत पैसे हैं पर ऐसा नहीं है। हां मैंने काम बहुत किया है जैसे गांव प्रकाशीकरण अभियान, किसानों के गेहूं के समय युरिया का विषय हो चाहे बिजली की समस्या हो, पानी की समस्या, बीमार लोगों की मदद की बात हो, सरकारी योजना हो, किसानों की छोटी छोटी समस्याओं से लेकरं बडे समस्याओं तक हर बार मैं कंधे से कंधा मिलाके हमेशा किसानो के साथ खड़ा रहा हूं। दारव्हा के किसानो को पानी की जरूरत थी तब अडान नदी में मसनी धरण का पानी मैंने छोड़ने लगाया, किसानों को लाईट ट्रॅप बांटे, किसानों के बच्चों को साइकिल दिए ताकि गरबी परिवार के बच्चे पढ़ लिखकर कुछ बनें, सामाजिक काम बहुत किये हैं बताने लगूं तो पूरा पेज कम पड़ेगा।
(5) आप जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं?
मैं जानता से इतना ही कहना चाहता हूं कि मेरे सामाजिक काम को देखें और इन अफवाहों पे ध्यान न दें।
मैने आप लोगों के लिए बहुत काम किये, सड़क के खड्डे तक खुद रास्तों में उतर के भरवाए हैं। क्या सट्टा मटका अवैध धंधे के खिलाफ आवाज उठाना गलत बात है? सट्टा मटका के विषय से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ये सब पुराने मुद्दे लेकर मुझे रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
from New India Times http://bit.ly/2UPyri8

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