भोपाल। कुछ समय पहले ही खुलासा हुआ था कि शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री रहते हुए मुख्यमंत्री पद का वेतन ले रहे थे और मीसाबंदियों को मिलने वाली सम्मान निधि भी ले रहे थे। तत्समय शिवराज सिंह ने इसे अपना अधिकार बताया था। जबकि इधर झाबुआ के एक किसान ने किसान सम्मान निधि का पैसा सेना को दान कर दिया। ये वो किसान ने जो देशभक्ति के भाषण देकर आज तक सरपंच भी नहीं बना।
किसान ने क्या किया
टमाटर की खेती के लिए मशहूर पेटलावद के युवा किसान महेंद्र हामड़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हस्तलिखित पत्र के माध्यम से पाकिस्तान को सबक सिखाने का आग्रह किया है। यह पत्र उन्होंने पीएम हाउस प्रेषित कर दिया है। पारिवारिक परिस्थितियों व पिता के निधन के बाद 11वीं के पढ़ाई छोड़ने वाले युवा किसान महेंद्र ने जो पत्र प्रेषित किया है। उसमें उन्होंने उल्लेख किया है कि उनके द्वारा चालू की गई किसान सम्मान निधि योजना, जिसमें लघु व सीमांत किसानों को 6 हजार रुपए साल दिए जाना हैं। वह उन्हें नहीं चाहिए, उनकी ओर से यह राशि वे (पीएम) सैन्य सहायता कोष में डाल दें, पर पाकिस्तान को ऐसा सबक सिखाएं कि बार-बार की परेशानी हमेशा के लिए खत्म हो जाए।
सोशल मीडिया ने पूछा कौन महान
अब सवाल यह गूंज रहा है कि दोनों में से कौन महान। शिवराज सिंह चौहान या झाबुआ का किसान। शिवराज सिंह चौहान वो जो 1976 में मीसा एक्ट के तहत गिरफ्तार हुए और इसके बदले देशभक्ति के गीत गाते गाते मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री तक बन गए और दूसरा महेंद्र हामड़ झाबुआ का किसान वो जिसने अपने परिवार पालन के लिए पढ़ाई छोड़ दी। पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए टमाटर की फसल देने से मना कर दिया और अब अपनी सम्मान निधि भी दान कर दी।
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