भोपाल। भारतीय जनता पार्टी में लोकसभा चुनाव की दौड़ शुरू हो गई है। जिन्हे विधानसभा का टिकट नहीं मिल पाया वो स्वभाविक तौर पर लोकसभा टिकट की दावेदारी कर रहे हैं परंतु चौंकाने वाली बात यह है कि शिवराज सरकार के जो मंत्री खुद की विधानसभा सीट नहीं जीत पाए वो भी लोकसभा टिकट की मांग कर रहे हैं।
लोकसभा टिकट मांगने वालों में पूर्व वित्तमंत्री एवं दमोह के राजा जंयत मलैया सबसे बड़ा नाम है। मलैया इस तरह बात करते थे मानो दमोह सीट उनकी जागीर है, इस सीट पर उनका और उनके बेटे का अधिपत्य रहेगा। वो जहां कहेंगे जनता वहां वोट कर देगी परंतु खुद ही चुनाव हार गए। पूर्व मंत्री एवं भोपाल के भाजपा नेता उमाशंकर गुप्ता खुद को निष्कलंक नेता बताते रहे। इनके लिए कई गैर राजनैतिक लोगों ने प्रचार भी किया, कोई विरोधी लहर नहीं थी लेकिन हार गए। अब भोपाल सीट से लोकसभा का टिकट चाहते हैं।
दीपक जोशी: पिता कैलाश जोशी के कारण मंत्री बन गए थे। चुनाव हार जाने के बाद भी खुद को बड़ा नेता मानते हैं।
रुस्तम सिंह: इलाके में जबर्दस्त विरोध है, विधानसभा हार चुके हैं लेकिन लोकसभा पर नजर है।
जयभान सिंह पवैया: एक जमाने में इन्होंने स्व. माधवराव सिंधिया को ग्वालियर सीट छोड़कर भागने पर बाध्य कर दिया था। अब हालात यह है कि अपनी सीट पर भी नहीं जीत पाए। अक्सर लोकसभा टिकट मांगते रहते हैं। इस बार भी मांग रहे हैं।
लाल सिंह आर्य, अंतर सिंह आर्य, ओमप्रकाश धुर्वे, अर्चना चिटनिस, नारायण सिंह कुशवाह, बालकृष्ण पाटीदार, शरद जैन और ललिता यादव भी ऐसे ही नाम हैं जो अपनी सीटें हार गए और अब लोकसभा का टिकट चाहते हैं।
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