
स्वयं करें पहल:- आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई यही कहता मिल जाता है कि क्या करें काम से फुर्सत ही नहीं मिलती। मैं तुमसे मिलना तो चाहती हूं, लेकिन मुलाकात कैसे संभव हो…। यह सौ फीसद सच है कि वर्तमान समय में हरेक की लाइफ में व्यस्तता बढ़ गई है। जिस प्रकार से आप सोचती हैं कि मैं बहुत व्यस्त हूं। ठीक इसी प्रकार से आपकी सहेलियां भी सोचती होंगी। इसलिए कभी इस बात का इंतजार न करें कि जब मेरी सहेलियां मुझसे मिलने की पहल नहीं करती हैं तो मैं ही क्यों पहल करूं। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि दोस्ती की राह में इस तरह की अतार्किक बातें नहीं आनी चाहिए। अगर आप अपनी सहेली से मिलने की पहल करती हैं तो यह आपका बड़प्पन ही होगा। आप अपनी सुविधानुसार महीने या दो महीने में अपनी किसी सहेली को घर पर आमंत्रित कर सकती हैं। नई टेक्नोलाजी का फायदा उठाते हुए सोशल साइट्स के जरिए उनके हालचाल रोज ले सकती हैं। इसके अलावा हम समय-समय पर एक-दूसरे के घर में बैठक भी कर लेते हैं। आपस में मुलाकात होने पर ऐसा लगता है कि हम सभी फिर से जिंदगी जीने के लिए रीचार्ज हो गए हैं।
वादा निभाना:- यह तो आपने भी महसूस किया होगा कि अगर किसी सहेली ने आपसे किसी प्रकार का कोई वादा किया और वह पूरा नहीं कर पा रही है तो आपके मन में खीझ जरूर उठती होगी। ठीक ऐसा ही आपकी सहेलियों को भी महसूस होता है, जब आप उनसे किए वादे पूरे नहीं करतीं। रिलेशनशिप एक्सपट्र्स का कहना है कि यदि आप अपनी किसी सहेली से किसी भी तरह का कोई वादा करती हैं तो उसे पूरा करने की पूरी कोशिश करें।
चाय पर गपशप:- मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि दोस्ती बढ़ाने का सबसे सही और आसान रास्ता है चाय का प्याला थामना और थमाना। अपनी किसी पुरानी सहेली के साथ चाय की चुस्कियों के बीच एक-दूसरे के सुख-दुख से जुड़ी बातें करना दोस्ती का लुत्फ उठाने का बहुत ही आसान तरीका है। यदि बात करने के लिए आपको कोई विषय नहीं मिल रहा हो तो भी आप अपनी सहेली से कोई नई जानकारी लें।
from News85.in https://ift.tt/2RFqtCN
Social Plugin