
शोधकर्ताओं ने पाया कि नियमित रूप से मेवे खाने से श्वसन संबंधी बीमारियों और मधुमेह से मौत होने का खतरा भी काफी कम हो जाता है।
सूखे मेवों की खपत से जुड़े 29 मौजूदा अध्ययनों का विश्लेषण कर यह नतीजा निकाला। ये अध्ययन दुनिया के विभिन्न हिस्सों में प्रकाशित हुए थे। इन अध्ययनों में कुल 8.19 लाख लोग शामिल हुए थे। इनमें से 12 हजार से अधिक लोग दिल की धमनी के रोग से पीड़ित थे। जबकि 18 हजार लोग दिल से जुड़ी अन्य बीमारियों के और नौ हजार लोग आघात के मरीज थे।
कैंसर और अकाल मौतों के 85 हजार से अधिक मामले भी इनमें शामिल थे। प्रतिभागियों के लिंग, आवास क्षेत्र और जोखिम के अलग-अलग कारकों का अध्ययन के नतीजों पर थोड़ा असर दिखा। इसके बावजूद शोधकर्ताओं ने पाया कि थोड़े से मेवे रोजाना खाने से दिल की बीमारी और कैंसर समेत कई रोगों से सभी लोगों का बचाव होता है। इस अध्ययन में अखरोट और बादाम समेत पेड़ों से मिलने वाले तमाम तरह के मेवे शामिल किए गए। इसमें मूंगफली और सूरजमुखी के बीजों को भी शामिल किया गया। नतीजे इन सभी मेवों के सम्मिलित उपयोग के आधार पर निकाले गए।
शोधकर्ताओं ने कहा, मेवों में उच्च पोषकता मौजूद है जो इन्हें इतना लाभदायक बनाती है। उनके अनुसार, बादाम और मूंगफली में बड़ी मात्रा में फाइबर, मैगनेशियम और बहुसंतृप्त वसा पाए जाते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित कर दिल की बीमारियों को दूर रखने में सहायक होते हैं। अखरोट और सूरजमुखी के बीजों में काफी एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त होने से बचाते हैं और संभवतः कैंसर का जोखिम कम करते हैं।
मेवों में वसा अमूमन अधिक मात्रा में पाई जाती है, लेकिन उनमें फाइबर और प्रोटीन भी भरपूर होता है। कई अध्ययनों से ऐसे संकेत मिले हैं कि मेवे वास्तव में मोटापे का खतरा कम कर सकते हैं। इस अध्ययन से यह भी पता चला कि जो लोग रोजाना 20 ग्राम से अधिक मेवे खाते हैं, उनके स्वास्थ्य में अतिरिक्त सुधार के कोई संकेत नहीं मिले।
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