भोपाल। मध्यप्रदेश में दिग्विजय सिंह को एक बार फिर राजा साहब कहकर पुकारा जाने लगा है। कांग्रेस में कहा जा रहा है कि इस बार दिग्विजय सिंह सरकार बनाने जा रहे हैं और उनकी कृपा से कमलनाथ मुख्यमंत्री हो सकते हैं। इन सबके बीच एक चौंकाने वाली खबर आ रही है। पुणे पुलिस का दावा है कि गिरफ्तार हुए नक्सली नेताओं के फोन में दिग्विजय सिंह का नंबर मिला है। इसी के साथ दिग्विजय सिंह 'भीमा कोरेगांव हिंसा' मामले में जांच की जद में आ गए हैं। पुलिस अगला कदम उठाने से पहले सबूत जुटा रही है कि
क्या नक्सली नेता दिग्विजय सिंह के संपर्क में थे।
क्या दिग्विजय सिंह ने नक्सली नेताओं को समर्थन दिया था।
क्या 'भीमा कोरेगांव हिंसा' के पीछे दिग्विजय सिंह का शातिर दिमाग है।
पुणे पुलिस के डीसीपी सुहास बावचे ने कहा कि यह जांच बहुत संवेदनशील और हाई प्रोफाइल लोगों से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि हम इस मामले में सभी ऐंगल से पड़ताल कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो हम दिग्विजय सिंह को जांच में जुड़ने के लिए समन भी कर सकते हैं।
इससे पहले बीजेपी नेता संबित पात्रा ने आरोप लगाए थे कि दिग्विजय सिंह के कनेक्शन्स नक्सलियों के साथ हैं। बीजेपी के इस आरोप पर वरिष्ठ कांग्रेस ने बेहद सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि अगर बीजेपी मुझ पर नक्सली होने के आरोप लगा रही है तो सरकार मुझे गिरफ्तार क्यों नहीं करती? कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्हें पहले भी देशद्रोही कहा जा चुका है, इसलिए सरकार उन्हें गिरफ्तार करे।
गौरतलब है कि जून में गिरफ्तार ऐक्टिविस्ट रोना विल्सन को नक्सली नेता मिलिंद टेल्टुम्ब्डे का खत मिला था। इस खत में लिखा था कि कई नेता उनकी मदद करने को तैयार है। इस मामले में जब माओवादी समर्थक नेताओं प्रकाश उर्फ रितुपन गोस्वामी और सुरेंद्र गाडलिंग के मोबाइल नंबर की पड़ताल की गई तो एक जांच में पाया गया कि एक नंबर उसमें से मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का था।
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