बेटा अपने पिता की संपत्ति का स्वभाविक दावेदार होता है। संपत्ति के लिए कई बार विवाद भी होते हैं और यह अपराध की हद तक चले जाते हैं। कभी-कभी माता-पिता नहीं चाहते कि उनकी संपत्ति उनके बेटे को मिले। बेटे को संपत्ति से "बेदखल" करने के लिए क्या कानूनी प्रक्रियाएं अपनाना चाहिए ( What is the procedure to disown son from the property )।
यदि PROPERTY पैतृक है तो पिता अपने बेटे को उससे बेदखल नहीं कर सकता।
यदि संपत्ति माता-पिता द्वारा अर्जित की गई है तो उन्हे पूरा अधिकार है कि वो अपनी एक संतान या सभी संतानों को चाहे वो बेटा हो या बेटी, संपत्ति से बेदखल कर दें।
वकील के माध्यम से एक सार्वजनिक सूचना बनवाकर उसे स्थानीय समाचार पत्र में प्रकाशित कराएं।
इस तरह से कानूनी वारिस का अस्वीकरण एक सीमित उद्देश्य के लिए अच्छा है।
यदि आप हमेशा के लिए बेटा/बेटी या कानूनी वारिस को प्रॉपर्टी से बेदखल करना चाहते हैं तो इसके लिए सिर्फ एक ही रास्ता है। आप एक रजिस्टर्ड वसीयत बनाएं जिसमें स्पष्ट करें कि कुल कितने लोग आपकी प्रॉपर्टी के कानूनी वारिस हैं और उनमें से किस किस को आप बेदखल/अस्वीकरण कर रहे हैं या वारिस के अधिकार से हटा रहे हैं।
बेटे को हस्तांतरित PROPERTY भी वापस ले सकते हैं
धारा 23 के मुताबिक, बच्चे अगर अपने मां-बाप और बुजुर्गों की देखभाल करने में असफल होते हैं तो ऐसी स्थिति में मां-बाप संपत्ति का हस्तांतरण कर दोबारा संपत्ति के हकदार हो सकते हैं।
कानून में प्रावधान है कि अगर बच्चे देखभाल का भरोसा देकर संपत्ति हथियाने की कोशिश करते हैं तो वैसी स्थिति में बुजुर्ग दोबारा संपत्ति को अपने नाम पर हस्तांतरित कर सकते हैं।
मेंटीनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पैरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट, 2007 आंध्र प्रदेश, असम, दिल्ली, गोवा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, नागालैंड, राजस्थान और त्रिपुरा में अधिसूचित है।
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