नई दिल्ली। बाबा रामदेव द्वारा प्रमोट की गई कंपनी पतंजलि आयुर्वेद ने शीर्षासन लगा दिया है। 5 साल में पहली बार पतंजलि आयुर्वेद की बिक्री घटी और मुनाफा आधा रह गया। वित्त वर्ष की समाप्ति पर मार्च 2018 में 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। किसी भी कंपनी के लिए यह बहुत बड़ा झटका होता है। बताया जा रहा है कि यह झटका वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और कमजोर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के कारण लगा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पतंजलि आयुर्वेद की बिक्री में गिरावट की मुख्य वजहें, जीएसटी को अपनाने में आई बाधा और सप्लाइ चेन की कमजोरी थीं। हालांकि, कंपनी के संस्थापक बाबा रामदेव इसे 3 से 5 सालों में 20,000 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक पहुंचाना चाहते थे। पतंजलि का रेवेन्यू 2016 में 10,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था, जबकि 2012 में यह 500 करोड़ रुपये से भी कम था।
पतंजलि के पास खुद के चिकित्सालय होने की वजह से शुरू में इसकी लोकप्रियता काफी तेजी से बढ़ी थी। मगर पतंजलि के सामान जनरल स्टोर्स पर जाने से कंपनी के चिकित्सालयों पर प्रभाव पड़ने लगा। नवी मुंबई स्थित एक पतंजलि चिकित्सालय के मालिक ने ईटी प्राइम को बताया, 'शुरुआत में पतंजलि की नीति सबसे पहले हमें सामान देने की थी, लेकिन अब इसके सामान पहले सामान्य बाजार में चले जाते हैं।'
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