नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी भी अब क्षेत्रों और राज्यों के हिसाब से बदल गई है। पूरे देश में पार्टी का नाम तो एक है परंतु नीतियां अलग अलग हैं। राजस्थान में 7 संतों को सम्मान के साथ टिकट दिया है जबकि मध्यप्रदेश में 700 से ज्यादा संत भाजपा सरकार के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। यहां भाजपा ने साध्वी उमा भारती को राजनीति से बेदखल किया और संत रामकृष्ण कुसमारिया तक को टिकट नहीं दिया।
राजस्थान में अब तक 162 प्रत्याशियों के नाम घोषित किए गए हैं। इनमें से एक भी मुस्लिम प्रत्याशी नहीं है। भाजपा ने बाड़मेर के तारातरा मठ के गादीपति प्रतापपुरी को पोकरण से मैदान में उतार दिया है। वहीं, भोपा जी ओटा राम देवासी तीसरी बार सिरोही से चुनाव लड़ेंगे। झुंझुनूं के लोहार्गल पीठ के महंत अवधेशाचार्य नवलगढ़ विधानसभा सीट, महंत चांदनाथ के शिष्य बालकनाथ का नाम बहरोड़ और योगी आदित्यनाथ का नाम तिजारा सीट से आगे आ रहा है। गौरतलब है कि महंत चांदनाथ अलवर से सांसद रह चुके हैं। वहीं महंत सुमेधानंद सीकर से सांसद है। बाड़मेर में तारातरा मठ के गादीपति है महंत प्रतापपुरी। बाड़मेर, चौहटन, जैसलमेर एवं सांचौर तक मठ का प्रभाव है। भाजपा ने पिछले चुनाव में बड़े अंतर से जीतने वाले शैतान सिंह का टिकट काटकर महंत प्रतापपुरी उतारा है।
मध्यप्रदेश में संत समाज विरोधी हो गया
मध्यप्रदेश में कम्प्यूटर बाबा ने राज्यमंत्री के दर्जा से इस्तीफा देकर शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ ताल ठोक दी है। वो पूरे प्रदेश में दौरा कर रहे हैं। इसके अलावा मध्यप्रदेश के पुजारी समाज और साधुओं के दूसरे संगठन भी भाजपा से नाराज हैं। भाजपा में सक्रिय संतों में साध्वी उमा भारती को तो पहले ही मप्र से बेदखल किया जा चुका है अब रामकृष्ण कुसमारिया जैसे भगवाधारी नेताओं के भी टिकट काट दिए। मध्यप्रदेश में प्रत्याशियों पर नजर डालें तो अब भाजपा का रंग भगवा नहीं बचा। वो कांग्रेस की तरफ सफेद नजर आ रहा है।
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