इंदाैर। मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार के सामने एक और समस्या आ गई है। इंदौर सहित प्रदेश के सभी सिनेमाघर और मल्टीप्लेक्स अनिश्चितकाल के लिए हड़ताल पर चले गए हैं।इस संबंध में सेंट्रल सर्किट सिने एसोसिएशन ने गुरुवार को घोषणा की थी। मप्र शासन द्वारा निगम को सिनेमाघरों पर मनोरंजन कर लगाने का अधिकार देने के बाद इंदौर नगर निगम ने पांच फीसदी मनोरंजन कर अधिरोपित कर दिया है। इसी तरह भोपाल व अन्य शहरों में भी नगरीय निकाय ने अलग-अलग दर लगा दी है।
सिनेमाघरों पर लगने वाला टैक्स सिनेमा संचालक और प्रोड्यूसर्स द्वारा आधा-आधा वहन किया जाता है, लेकिन इस मामले में प्रोड्यूसर्स गिल्ड ने मप्र में यह टैक्स वहन करने से साफ इनकार कर दिया है। उनका कहना है यह देश में कहीं भी नहीं लग रहा है, इसलिए हम प्रदेश में यह टैक्स नहीं देंगे।
सिनेमाघर संचालकों और प्रोड्यूसर्स ने प्रदेश के सिनेमाघरों में फिल्म रिलीज के लिए मिलने वाली सैटेलाइट की (जिससे सैटेलाइट के जरिए फिल्म सीधे सिनेमाघर में आती है) भी नहीं दी है। इसके चलते संचालकों ने सिनेमाघर बंद रखने की घोषणा कर दी।
इसमें सिनेमाघर संचालकों के साथ ही, फिल्म प्रोड्यूसर्स, मल्टीप्लैक्स एसोसिएशन व अन्य संगठन भी शामिल हैं। सेंट्रल सिने सर्किट एसोसिएशन के एक्जीक्यूटिव कमेटी के चेयरमैन ओपी गोयल ने कहा- सौ रुपए तक की टिकट पर 18 फीसदी और इससे अधिक दाम के टिकट पर 28 फीसदी जीएसटी लग रहा है।
नगर निगम प्रति शो 200 रुपए का प्रदर्शन टैक्स भी लेता है (हालांकि इंदौर में यह टैक्स मनोरंजन कर के बाद खत्म कर दिया है, लेकिन भोपाल व अन्य जगह है)। इसके अलावा मनोरंजन कर के नाम पर तीसरा टैक्स लिया जा रहा है। एसोसिएशन के अध्यक्ष जयप्रकाश चौकसे ने कहा यह कर प्रणाली असहनीय है। इससे सिनेमाघरों की हालत खराब हो जाएगी।
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