भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा के एक साल बाद शिक्षकों के पदनाम पर सरकार द्वारा निर्णय नही लिए जाने से नाराज शिक्षकों ने विधानसभा में परिवार सहित मतदान नही करने एवं कोर्ट के माध्यम से शिक्षकों की नई भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाने की धमकी दी है। समग्र शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेशचंद्र दुबे, प्रमुख मार्गदर्शक रामनारायण लहरी ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में 30 से 40 वर्षों से एक ही पद पर बिना पदोन्नति के कार्य करने वाले शिक्षकों के पदनाम परिवर्तन का मामला पिछले ढाई वर्षों से शासन स्तर पर लंबित है।
प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने विगत 5 सितम्बर और 23 सितम्बर 2017 को शिक्षकों के मंच पर आकर शिक्षकों के पद अपग्रेड करने की सार्वजनिक घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की घोषणा और विभागीय स्तर से कार्यवाही पूर्ण होने के बावजूद मुख्यमंत्री कार्यालय के चन्द अधिकारियो के विरोध चलते शिक्षकों के पदनाम का प्रस्ताव बार बार केबिनेट में जाने से रोका जा रहा है। जबकि पदनाम के मामले पर एक भी रुपए का वित्तीय भार नहीं है। सुरेश चन्द्र दुबे ने कहा प्रदेश के मुखिया द्वारा इस मुद्दे पर चुप्पी साधने से स्पष्ट होता है कि सरकार की नीयत पदनाम देने की नहीं है।
दुबे ने आरोप लगाया कि चंद अधिकारियों के नकारात्मक रवैए के कारण प्रदेश भर में मुख्यमंत्री की छवि धूमिल हो रही है। इस मामले को लगातार टाले जाने से प्रदेश के 110,000 (एक लाख दस हजार) शिक्षक परिवार सहित नाराज है और उन्होने आगामी विधानसभा चुनाव में मतदान नही करने का निर्णय लिया है। जिससे प्रदेश में करीब बीस लाख से अधिक मत प्रभावित होंने की स्थिति निर्मित होगी। जिसके लिए सरकार जिम्मेदार है।
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