भोपाल। फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर प्रदेशभर में नौकरी, स्कॉलरशिप और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का खेल चल रहा है। इस बात का खुलासा मैन्युअल जाति प्रमाणपत्र को डिजिटल बनवाने के लिए आ रहे आवेदनों की जांच से हो रहा है। ऐसे आवेदनों में लगे करीब 12 हजार 494 मैन्युअल जाति प्रमाण पत्र प्रदेश में बीते 24 जुलाई से अब तक फर्जी पाए गए हैं। जिनमें से 2733 जाति प्रमाण पत्र भोपाल के हैं। पुराना रिकॉर्ड न मिलने के कारण इन्हें निरस्त कर दिया गया है। इनकी संख्या और बढ़ने की आशंका है।
डिजिटल प्रमाण-पत्रों ने किया खुलासा
स्कूल-कॉलेज सहित अन्य जगहों पर जाति प्रमाण पत्र की डिजिटल कॉपी लगाना अनिवार्य हो गई है। इसलिए भोपाल सहित प्रदेशभर में मैन्युअल जाति प्रमाण पत्र को डिजिटल बनाने का अभियान चलाया जा रहा है। इन आवेदनों की जांच में कभी प्रमाण पत्र की मूल फाइल नहीं मिल रही, तो कभी पूरे दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में जांच अधिकारी इन जाति प्रमाण पत्रों को निरस्त कर रहे हैं।
भोपाल में बीते 24 जुलाई से अब तक ऐसे करीब 2830 आवेदन को निरस्त कर दिया गया है। इसमें अनुसूचित जाति-जनजाति के 1345 तो पिछड़ा वर्ग के 1388 जाति प्रमाण पत्र शामिल हैं। वहीं अनुसूचित जाति जनजाति के 28 आवेदनों को तो इसलिए निरस्त कर दिया गया, क्योंकि आवेदक ने अपने भाई के जाति प्रमाण पत्र के आधार पर आवेदन किया गया था। लेकिन जांच में न तो भाई का रिकॉर्ड मिला न ही स्वयं उनका, इसी तरह पिछड़ा वर्ग के 69 आवेदन निरस्त किए गए हैं।
इधर लोक सेवा प्रबंधन विभाग के डैशबोर्ड के अनुसार प्रदेशभर में 2 लाख 48 हजार 668 लोगों ने डिजिटल जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था। जांच करने के बाद इसमें से 13 हजार 414 आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं। वहीं 12 हजार 494 जाति प्रमाण पत्रों के रिकॉर्ड ही नहीं मिल पा रहे हैं। लिहाजा ये जाति प्रमाण पत्र फर्जी हैं। इसी तरह भोपाल में अब तक 2 हजार 733 जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं।
उठ रहे हैं ये सवाल।
कई जाति प्रमाण पत्र का पुराना रिकॉर्ड मिलान नहीं हो रहा है। इससे हेराफेरी की आशंका है। जिस कार्यालय से जाति प्रमाण पत्र जारी हुए हैं, वहां संबंधित रिकॉर्ड क्यों नहीं है। जाति प्रमाण पत्र फर्जी हैं तो आवेदकों ने कई बार अनुचित तरीके से इसका उपयोग कर लाभ लिया होगा, उसका क्या होगा।
ई-जाति प्रमाण पत्र जारी करने से पहले इसका रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। रिकॉर्ड न मिलने की स्थिति में जाति प्रमाण पत्र निरस्त किए जा रहे हैं। इसके लिए अभियान चलाया जा रहा है।
दिशा नागवंशी, ADM, भोपाल
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