भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि केंद्र सरकार ने क्रूड आइल पर एक्साइज़ ड्यूटी पर डेढ़ रूपया कम करके जनता को कोई राहत नहीं दी है। पिछले चार महीनों में पेट्रोल-डीजल के जो दाम बढ़े हैं, उसे देखते हुय यह बहुत कम है और ऊंट के मुंह में जीरा है। महंगाई से त्रस्त जनता के साथ यह एक क्रूर मजाक है।
कमलनाथ ने कहा है यदि सरकार को जनता की तकलीफ की वास्तव में चिंता है और वह जनता को राहत देना चाहती है तो एक्साइज ड्यूटी इतनी घटाना चाहिये जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम से कम दस-पंद्रह रूपये घट सकें। जिस तरह से हर रोज दाम बढ़ रहे हैं उससे तो पेट्रोल-डीजल के दाम दस-पंद्रह दिनों में फिर जहां के तहां हो जायेंगे। फिर यह कैसी राहत है, ऐसी एक्साइज ड्यूटी कम करने से क्या फायदा? पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का प्रभाव सीधा-सीधा आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। डीजल की कीमत बढ़ने से माल भाड़ा बढ़ता है और रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी हो जाती हैं। यही कारण है कि आज महंगाई चरम पर है। हर घर में रोज लगने वाली चाय, शक्कर, सब्जी, दूध, दाल, चांवल सभी महंगे हो गये हैं। इस महंगाई ने तो जनता की कमर तोड़ दी है। पेट्रोल-डीजल गैस की बढ़ती कीमतों का सीधा असर अब हर परिवार की रसोई पर पड़ रहा है।
कमलनाथ ने कहा है कि यदि सरकार वास्तव में कीमत कम करना चाहती है तो वह यूपीए सरकार की तरह एक्साइज ड्यूटी निर्धारित करे। उस समय क्रूड आइल 124 डाॅलर प्रति बैरल था, तब पेट्रोल-डीजल के भाव 55-60 रूपये थे। आज जब क्रूड आइल 70-75 डाॅलर प्रति बैरल है तब पेट्रोल 92 रूपये प्रति लीटर तक बिक रहा है। केंद्र की मोदी सरकार को यदि जनता की जरा भी चिंता है तो क्रूड आइल पर ज्यादा एक्साइज ड्यूटी कम करने के साथ-साथ राज्य सरकारों पर भी दबाव बनाना चाहिये कि वे पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने का प्रस्ताव कंेद्र को भेजें।
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