भोपाल। चुरहट का पत्थर तो कांग्रेसी था परंतु सीधी में सामने गिरे जूते की पार्टी अब तक पता नहीं चल पाई। भारत बंद का असर भारत में कहां कहां रहा, पूरी रिपोर्ट का इंतजार है परंतु पहली बार मध्यप्रदेश जरूर पूरी तरह से बंद रहा। परिणाम यह हुआ सीएम शिवराज सिंह के सिर से जातिवाद का भूत उतर गया है। पिछले दो दिनों से उन्होंने जातियों को छोडकर गरीबों की बात शुरू कर दी है। बता दें कि सीएम शिवराज सिंह ने बिना निमंत्रण के अनुसूचित जाति के कर्मचारी संगठन के कार्यक्रम में जाकर ऐलान किया था कि 'कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता।'
अब कह रहे हैं गरीबों में जातिभेद नहीं होता
आज खंडवा के जावरा में शिवराज सिंह ने कहा गरीबों में जातिभेद नहीं होता। मुझे सभी गरीबों का कल्याण करना है। यह बात को ध्यान में रखकर बिना किसी भेदभाव के सभी गरीबों के लिए संबल योजना बनाई। वो यहां जन आशीर्वाद यात्रा लेकर आए थे। इससे पहले 5 अगस्त को सीएम शिवराज सिंह की एक अपील सामने आई थी। अपील भाजपा कार्यालय की ओर से जारी की गई थी परंतु पहली बार किसी अपील में शिवराज सिंह प्रार्थना करते हुए नजर आ रहे थे।
घमंड अब भी बाकी है
शिवराज सिंह के भाषणों से जातिवाद वाले शब्द तो गायब हो गए परंतु घमंड अब भी बाकी है। कोई भी सरकार किसी भी प्रकार की योजना चलाती है तो उस योजना का खर्चा जनता उठाती है। राज्य को डायरेक्ट और इंडायरेक्ट टैक्स देने वालों पर हर योजना का बोझ आता है परंतु शिवराज सिंह अपने भाषणों में अक्सर ऐसे शब्दों का प्रयोग करते हैं मानो वो संबंधित योजना का खर्चा अपनी निजी कमाई से कर रहे हैं। यह घमंड अब भी बाकी है। आज भी मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब चाहे किसी भी वर्ग के हों, उन्हें चार सालों में मकान बनाकर दूंगा। यहां संभ्रांत वर्ग को आपत्ति 'दूंगा' शब्द से होती है। शिवराज सिंह के विरोध का यह भी एक बड़ा कारण है।
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