भोपाल। पिछले कई सालों में मप्र में शिक्षक भर्ती नहीं कराए जाने का रहस्य सामने आया गया है। शिवराज सिंह सरकार, सरकारी स्कूलों को ठेके पर देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए प्रस्ताव भी तैयार हो चुका है। चुनाव बाद अगले शिक्षा सत्र से यह प्रभावी भी हो सकता है।
स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री दीपक जोशी का कहना है कि सरकार अपने सरकारी स्कूल निजी स्कूल संचालकों को ठेके पर दे सकती है। इस संबंध में शिक्षा विभाग एक प्रस्ताव भी तैयार कर चुका है। प्रस्ताव ये है कि शहरी इलाकों के उन सरकारी स्कूलों में, जहां बच्चों की संख्या काफी कम हो चुकी है, उन्हें निजी हाथों में ठेके पर दे दिया जाए। निजी स्कूल संचालक सरकारी स्कूल के उस भवन में अपनी शाखा खोल सकते हैं। बस शर्त ये रहेगी कि उस सरकारी स्कूल में जो बच्चे पहले से पढ़ रहे हैं, प्राइवेट स्कूल संचालक उन्हें अपने साथ एडजस्ट करें।
इस प्रस्ताव के पीछे तर्क ये है कि इसके बदले सरकार को सरकारी स्कूल के रखरखाव में मदद मिलेगी और उस क्षेत्र के बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ने का मौका मिलेगा। दीपक जोशी के मुताबिक नामी स्कूलों में बच्चे पढ़ने जाते ही हैं, ऐसे में उन्हें दूर नहीं जाना पड़ेगा और अच्छे प्राइवेट स्कूल उनके क्षेत्र में एविलेबल हो जाएंगे। जोशी का कहना है ये कोई निजीकरण नहीं है, बल्कि इससे सरकारी स्कूलों की मदद होगी। जोशी के मुताबिक सरकारी स्कूलों का स्तर सुधारने के लिए ये कदम मददगार साबित होगा।
सरकार की इस तैयारी की भनक लगते ही कांग्रेस ने इसके विरोध का मन बना लिया है। कांग्रेस मीडिया सेल की चेयरपर्स शोभा ओझा का कहना है कांग्रेस ने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई काम किए। शिक्षा का अधिकार देने वाली पार्टी कांग्रेस थी लेकिन वर्तमान सरकार निजी हाथों बिक चुकी है। अगर शिक्षण संस्थानों को प्राइवेट हाथों में सौंपा गया तो कांग्रेस पूरे प्रदेश में आंदोलन करेगी। हालांकि बीजेपी का कहना है शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए बीजेपी सरकार कई फैसले ले रही है। इसे निजीकरण से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
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