दयाशंकर पांडेय, प्रतापगढ़ (यूपी), NIT;

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जिस तरह से देश में मौन विरोध का खाका खींचा गया है वह आने वाली पीढ़ियों के लिए ऊर्जा व मजबूत राह दिखा सकता है। आजादी की लड़ाई कमज़ोर करने के लिए कितनी कोशिश हुई थी फिर भी देश आजाद हुआ था। देश की जनता को काले कानून की जंजीरों से जकड़ने का जो काला अध्याय लिखने का साहस सत्ताधीशों ने किया है वह अक्षम्य है। देश थम गया है, अपनी उस उम्मीद पर जिसकी कल्पना भी नहीं की होगी। न्यायपालिका से लेकर, चौकीदार की जबाबदेही निभाने वाले लोगों के मन में भी यह पीड़ा साफ झलक रही है, जो देश में काले अध्याय के रूप में परोसा गया है।
ST/SC कानून के सहारे चैलेंज दिया था हमारी समरसता व एकता को ?हमको बना दिया नागरिक दोयम दर्जे का?
अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का…??
देश को हिन्दुत्व व राम मंदिर के नाम पर गुमराह कर देश की हुकूमत हथियाने वाले, देश के सवर्ण समाज से कितनी नफ़रत पाले हुए थे यह उभरकर सामने आ चुका है, देश का आवाम जिस जगह है, जिस स्थिति में है वहीं थम गया है, ऐसी तस्वीरें तो आपातकाल लगा कर देखने को नहीं मिल सकतीं थी??
जो आज 6 सितम्बर 2018 को एक देश ने एक आवाज़ बन कर अपनी अनेेकता में एकता की मिशाल क़ायम की है!! देश मौन है, न हिलेगा, न डुलेगा, अहिंसा अस्त्र लेकर ऐसी नजीर पेश करेगा जो शांति का टापू , सोने की चिड़िया भारत देश है अपनी खुशहाली पर मस्त रहेगा!
आज सत्ता के कदम थामकर, सवर्ण समाज देश की व्यवस्था परिवर्तन के लिए तैयार है!! देश की एकता व सादगी की इबारत पढना मुश्किल होगा सत्ताधीशों को। जो मुगालते में थे देश की 75% जनता को काले कानून में बांधने के लिए।
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