PM कोई भी बने, बस RSS वाला ना हो, राहुल गांधी के संकेत | NATIONAL NEWS

नई दिल्ली। 2019 लोकसभा चुनाव के लिए राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर प्रोजेक्ट कर रही कांग्रेस ने मंगलवार को अचानक नए संकेत दिए। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस किसी भी विपक्षी दल के नेता को पीएम पद के उम्मीदवार के रूप में स्वीकर करने को तैयार है, लेकिन उसे संघ का समर्थन नहीं होना चाहिए। भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए पार्टी विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय दलों से गठबंधन पर भी विचार कर रही है। क्या राहुल महिला उम्मीदवार के लिए किनारे हट जाएंगे? इस सवाल पर सूत्र ने बताया, वे (राहुल) किसी को भी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर देखने को तैयार हैं, बस उसे संघ का समर्थन नहीं होना चाहिए। देखते हैं, पासा क्या खेल दिखाता है।

महिला पीएम कैंडिडेट पर विचार
इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले चुनाव में विपक्ष किसी महिला को भी प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बना सकता है। बसपा प्रमुख मायावती और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी का नाम भी चर्चा में है। रविवार को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद पार्टी ने कहा था कि राहुल ही प्रधानमंत्री पद का चेहरा होंगे और उन्हें समान सोच वाली पार्टियों से गठबंधन का अधिकार दिया गया है। सूत्र ने बताया, 2004 से 2014 तक काफी बदलाव हो गया है। ये हमारे लिए आम राजनीतिक लड़ाई नहीं है। ये सिद्धांतों की लड़ाई है। पहली बार है, जब सभी संवैधानिक संस्थाओं पर हमला किया जा रहा है। संघ जितना ज्यादा कांग्रेस पर हमला करेगा, इससे हमारी पार्टी को मजबूत करने में और मदद मिलेगी। कांग्रेस लेफ्ट और राइट विचारधारा में भरोसा नहीं करती है, बल्कि वह उदार और व्यावहारिक विचार में भरोसा करती है। लीडरशिप को भरोसा है कि भाजपा को बिना किसी गुस्से और घृणा के हरा दिया जाएगा। 

यूपी-बिहार में कमल तोड़ने की तैयारी
सूत्र ने कहा, "तेदेपा और शिवसेना जैसी पार्टियां भी भाजपा से खुश नहीं हैं, ऐसे में उसे अगले चुनाव में पर्याप्त सीटें नहीं मिल पाएंगी। नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनने के लिए 280 सीटें चाहिए होंगी और ऐसा नहीं होने जा रहा है। महागठबंधन ने बिहार और उत्तर प्रदेश में सही तरीके से काम किया तो मोदी का दोबारा सत्ता में आना मुश्किल है। भारत को नए विचारों से गढ़े जाने की जरूरत है, लेकिन प्रधानमंत्री के पास अब नई योजनाएं नहीं हैं। वे 1990 के राजनीतिक ढांचे पर काम कर रहे हैं। भाजपा कुछ कॉरपोरेट घरानों के लिए काम कर रही है।"
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