इलाहाबाद। हाई कोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि रिटायरमेंट के बाद टीचर को मानदेय पर नियुक्त करना अनुचित नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने गांधी स्मारक इंटर कॉलेज सुराजन नगर, मुरादाबाद की प्रबंध समिति द्वारा 26 अक्टूबर 2017 के शासनादेश के विपरीत सहायक अध्यापकों की नियुक्ति का अनुमोदन करने से इनकार करने के आदेश को सही करार दिया है।
कोर्ट ने कहा है कि प्रबंध समिति को अस्थायी रिक्तियां भरने के मिले अधिकार का हनन नहीं किया गया है, क्योंकि शासनादेश के अनुसार 70 साल से कम आयु के सेवानिवृत्त अध्यापकों का पूल जिले स्तर पर तैयार किया गया है और वेबसाइट पर सूची उपलब्ध है। प्रबंध समिति को ऐक्ट की धारा 16 (ई)(11) के तहत अस्थायी रिक्तियों को 6 से 11 माह के लिए पूल से नियुक्ति करने का अधिकार है। पूल के बाहर से नियुक्ति शासनादेश के विपरीत होगी।
कोर्ट ने कहा है कि पूल बनने से रिक्त पद पर नियमित चयन होने तक प्रबंध समिति को योग्य व अनुभवी सेवानिवृत्त अध्यापकों की नियुक्ति का अवसर प्राप्त है। इस व्यवस्था का छात्रों को गुणकारी शिक्षा प्राप्त होने में सहयोग मिल रहा है।
कोर्ट ने कहा कि वित्तीय सहायता प्राप्त प्राइवेट कॉलेजों के अध्यापक व स्टाफ के वेतन पर सरकार भारी धन खर्च कर रही है। मानदेय पर सेवानिवृत्त अध्यापक को नियुक्त करना अनुचित नहीं है।
यह आदेश जस्टिस एसपी केसरवानी ने गजराज सिंह व अन्य की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। याची का कहना था कि, जब शासनादेश लागू हुआ तब तक प्रबंध समिति ने भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली थी। अस्थायी नियुक्ति का प्रबंध समिति को वैधानिक अधिकार प्राप्त है।
शासनादेश भूतलक्षी प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस तर्क को नहीं माना और कहा कि 2 अप्रैल 2018 को प्रबंध समिति ने नियुक्ति की, जबकि 5 अप्रैल 2018 को ही पूल बनकर तैयार हो चुका था।
प्रबंध समिति पूल से नियुक्ति कर सकती थी। कोर्ट ने कहा कि शासनादेश पूर्णपीठ के फैसले के विपरीत नहीं है। 8 मई 2018 को अनुमोदन से इनकार के आदेश में अनियमितता नहीं है।
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