ओवैस सिद्दीकी, अकोला (महाराष्ट्र), NIT;

इस समय छात्राएं रोड रोमियों, मनचलो से काफी परेशान हैं और समाज में बदनामी के डर से वे शिकायत नही करती हैं क्योंकि पहले ही वे समाज की विकृत मानसिकता जैसे लड़कियों को शिक्षा से वंचित रखना, बाहर निकलने पर रोक लगाना आदि से लड़कर शिक्षा प्राप्त करने स्कूल, विद्यालय,महाविद्यालय का रुख कर रही हैं एवं अपने माता-पिता के साथ शहर का भी नाम रौशन करती हैं। इस वर्ष भी जिले में शिक्षा के क्षेत्र में छात्राओं ने बाजी मार कर अव्वल रही हैं लेकिन यह मनचले उनके विचारवएवं भविष्य में सफल होने की योजनाओं पर ग्रहण लगाने जैसा काम कर रहे हैं। शहर में ऐसा कोई विद्यालय, महाविद्यालय परिसर नहीं बचा है जहां यह चिड़ीमार मौजूद न हों। जगह-जगह यह टोली के रूप में खड़े रहकर कॉलेज छूटने का इंतेजार करते हैं एंव कॉलेज छूटते ही कार या बाइक पर एक गाड़ी पर तीन-तीन चिड़ीमार सवार होकर तेज रफ्तारी से छात्राओं के आगे पिछे घूमकर परेशान करते हैं। कई परिसर में तो लड़कियों को गाड़ियों के झुंड से घेर कर फिल्मों की तरह गोल चक्कर काटकर छेड़ने की भी चर्चाएं छात्राओं में हैं। इन मनचलों के आतंक से कॉलेज के साथ-साथ ट्यूशन क्लास परिसर भी सुरक्षित नहीं हैं। शहर के रत्नलाल प्लॉट चौक ,सिविल लाईन चौक, तोषनीवाल लेआऊट, शिवजी कॉलेज चॉक, अकोट फाइल,गोडबोले प्लॉट, गवर्नमेंट आइटीआइ कॉलेज, गर्ल्स आइटीआइ, जयहिंद चॉक, गौरक्षण रोड, रिंग रोड, डाबकी रोड़ आदि परिसर में यह मनचले आसानी से देखे जा सकते हैं। इन चिडिमारों के सिर पर कूछ सफेद कॉलर वाले नेता एवं अपराधी प्रवृत्ति के गिरोह का हाथ होने की चर्चाएं नागरिको में हैं जो सरे आम कानून की धज्जियां उड़ाते है। क्या इसी वजह से पुलिस मनचलों पर करवाई करने से गुरेज कर रही है या फिर इन सामाजिक कंटकों द्वारा पुलिस प्रशासन को कोई नजराना दिया जा रहा है? पथक एवं पुलीस की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है। आखिर किसकी शह पर यह मनचले बेखौफ है? कौन है इनका सरपरस्त? सब प्रश्न मानो पहेली बन गए हैं क्योंकि कहते हैं अगर पुलीस चाहे तो परींदा भी पर नही मार सकता, इसी के चलते नागरिकों द्वारा मांग की जा रही है कि शैक्षणिक परिसरों में पुलिस बंदोबस्त का प्रबंध किया जाए ताकि इन मनचलों से छात्राओं को राहत मिले।
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