भोपाल। अशोकनगर जिले की मुंगावली और शिवपुरी जिले की कोलारस सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। इसे सीएम शिवराज सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच का सीधा मुकाबला माना गया था। कोलारस में जीत के लिए शिवराज सिंह ने रिकॉर्ड तोड़ मेहनत की थी। भाजपा अब तक इस हार को भुला नहीं पाई है और 2018 विधानसभा चुनाव में इसका बदला लेने की तैयारी कर रही है। सूत्रों का कहना है कि इस बार भाजपा ज्योतिरादित्य सिंधिया की ताकत कमजोर करने पर काम कर रही है। यदि रणनीति काम कर गई तो कोलारस में यादवों का कुनबा 2 हिस्सों में बंटा नजर आएगा।
यादवों के कुनबे में भाजपा की सेंधमारी
भाजपा के रणनीतिकारों ने यहां यादवों के कुनबे को टारगेट किया है। कोलारस विधानसभा में 3 ताकतवर यादव नेता हुआ करते थे। लाल साहब यादव, रामसिंह यादव और बैजनाथ यादव। इनमें से लाल साहब और राम सिंह का स्वर्गवास हो गया। बैजनाथ यादव अब भी मैदान में हैं और उनकी क्षेत्र में सबसे मजबूत पकड़ भी है। वरिष्ठता की नजर से देखें तो टिकट के दावेदार बैजनाथ ही थे परंतु ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राम सिंह के बेटे महेंद्र यादव को टिकट थमा दिया। सब जानते हैं कि इस चुनाव में जीत के कारण सिर्फ 3 थे।
भाजपा प्रत्याशी देवेन्द्र जैन का विरोध।
ज्योतिरादित्य सिंधिया का जबर्दस्त जनसंपर्क।
बैजनाथ यादव परिवार का समर्थन।
बैजनाथ को टिकट देना चाहती है भाजपा
सूत्रों का कहना है कि भाजपा की नजर अब यहां बैजनाथ यादव परिवार पर लग गई है। बैजनाथ यादव को बतौर प्रत्याशी उतारने के लिए बातचीत का दौर शुरू हो गया है। यदि सबकुछ ठीक रहा तो धूमधाम के साथ बैजनाथ यादव का कुनबा कांग्रेस से भाजपा में ज्वाइन करता नजर आएगा। यह नजारा जन आशीर्वाद यात्रा में भी दिखाई दे सकता है। बता दें क कोलारस के यादव समाज ने महेंद्र यादव को अब तक अपना नेता नहीं माना है। सिंधिया की कृपा से वो विधायक तो बन गए परंतु शायद आखरी बार। कहा जा रहा है कि यह संदेश ज्योतिरादित्य सिंधिया तक भी पहुंचा दिया गया है कि यदि अगली बार महेंद्र यादव को टिकट दिया तो एकजुटता की उम्मीद मत करना।
भाजपा में कितने दावेदार
फिलहाल कोलारस विधानसभा सीट से भाजपा के कई नेता तैयारियां कर रहे हैं। शर्मनाक हार के बाद देवेन्द्र जैन तो पीछे हट गए हैं परंतु उन्होंने अपने छोटे भाई जितेन्द्र जैन उर्फ गोटू को आगे बढ़ा दिया है। टिकट हासिल करने की कला में जैन बंधु माहिर हैं अत: आश्वस्त भी हैं।
वीरेन्द्र रघुवंशी यहां से दमदार दावेदारी करते हैं परंतु उनकी बदजुबानी ने उन्हे अपनी ही भाजपा में अछूत बना रखा है। सिंधिया विरोधी होने के बावजूद भाजपा में उन्हे कोई तवज्जो नहीं मिलती।
आलोक बिंदल: हमेशा की तरह लिस्ट में एक नाम है। दावेदारी जारी है। जब सारे विकल्प समाप्त हो जाएंगे तो उम्मीद है कि इन्हे टिकट मिल जाए।
सुरेन्द्र शर्मा: एबीवीपी से राजनीति की शुरूआत करने वाले सुरेन्द्र शर्मा प्रदेश की राजनीति से अब कोलारस में तेजी से सक्रिय हुए हैं। उपचुनाव में भी सुरेन्द्र शर्मा का नाम चला था। वो केवल जनसंपर्क नहीं कर रहे हैं बल्कि लोगों के बीच बैठकर समस्याओं को सूचीबद्ध कर रहे हैं और फिर उनके निदान की हर संभव कोशिश भी कर रहे हैं। अब तक कई सफलताएं उनके खाते में दर्ज हो गईं हैं। कोलारस में सुरेन्द्र शर्मा अब एक सहायता केंद्र बन गए हैं। उनकी यही सक्रियता उनके दावे को मजबूत कर रही है।
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