भोपाल। सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय (SANCHI UNIVERSITY OF BUDDHIST) के निर्मित होने वाले परिसर में अन्य देशों के अध्ययन केन्द्र की भी स्थापना की जायेगी। प्रारंभिक रूप से श्रीलंका और वियतनाम ने अपने-अपने देशों के अध्ययन केन्द्र स्थापित करने का प्रस्ताव दिया। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज मुख्यमंत्री निवास पर विश्वविद्यालय की साधारण परिषद की तीसरी बैठक में यह जानकारी दी गई। बता दें कि भोपाल समाचार ने 15 जुलाई को यह मुद्दा उठाया था। अभी सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के निजी भवन का मामला शेष है। फिलहाल यह किराए के भवन में चल रहा है और इसका किराया मंत्री गौरीशंकर शेजवार के बेटे को जाता है।
श्री चौहान ने बैठक में चर्चा के दौरान विश्वविद्यालय के अकादमिक संचालन के लिये जरूरी अधोसंरचना के निर्माण का काम अविलंब शुरू करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना के उददेश्यों को देखते हुए इसे अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप दिया जायेगा। श्री चौहान ने कहा कि यह विश्वविद्यालय भारतीय संस्कृति, ज्ञान और बौद्ध दर्शन के एकीकृत अध्ययन का बड़ा अकादमिक केन्द्र बनेगा। श्री चौहान ने विश्वविद्यालय की अकादमिक प्रगति और अन्य गतिविधियों के मूल्यांकन और समीक्षा के लिये उच्च स्तरीय समिति गठित करने के निर्देश दिये।
बैठक में बताया गया कि अन्य देशों के अध्ययन केन्द्रों की स्थापना संबंधी नीति तैयार कर ली गई है। चीनी भाषा का डिप्लोमा पाठ्यक्रम 2017-18 से प्रारंभ हुआ है। बैठक में निर्णय लिया गया है कि दिसम्बर माह के दूसरे सप्ताह में शाक्य तंत्र विषय पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जायेगा।
बैठक में संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री सुरेन्द्र पटवा, मुख्य सचिव श्री बी.पी.सिंह, अपर मुख्य सचिव संस्कृति श्री मनोज श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री अशोक बर्णवाल और श्री एस.के.मिश्रा, सांची बौद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर यज्ञेश्वर एस. शास्त्री एवं साधारण परिषद के सदस्य उपस्थित थे।
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