बिहार और विशेषकर सारण जिले के माटी-पानी में रचे-बसे रीति रिवाज पर आधारित ये कार्यक्रम अपने आप में यादगार रहा लेकिन सम्पन्नता इस पर हावी होती दिखी। राजशाही व्यवस्था के बीच हल्की आवाज में अमीर खुसरो की रुहानी नज्म फिजा को मदहोश बनाये जा रही थी।
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