इम्तियाज़ चिश्ती, ब्यूरो चीफ, दमोह (मप्र), NIT:

शहीदे आज़म कांफ्रेंस व महान सूफ़ी हुजूर मुफ्ती ए आज़म हिन्द के उर्से पाक की अजीमुश्शान महफ़िल का आयोजन दमोह के सुल्तानी गार्डन में हुआ. इस मौके पर अन्य प्रदेशों से मौलाना व स्थानीय शायरों के अलावा मेहमान शायरों ने शिरकत की. जलसे की सदारत पीरे तरीकत हजऱत सूफ़ी अब्दुर्रहमान साहब क़ादरी ने की और निज़ामत हाफ़िज ख़लील साहब ने की। जिसमें बाहर से आये, मौलाना सूफी अब्दुल रेहमान रजा कादरी खलीफा ए हुजूर मुफ्ती आजम हिंद बरेली शरीफ, मौलाना मुफ्ती कलीम उल कादरी बहराइच, मौलाना अख्तर रजा बरेली उत्तर प्रदेश, मौलाना फैजान रजा बरेली, शायर रजा जबलपुरी और शायर जहीर रजा बहेड़ी के अलावा दमोह से शायर ताबिश नैयर ने शिरकत की। इस अवसर पर मौलाना अख़्तर रज़ा साहब ने जलसे की सदारत कर रहे सूफी अब्दुर्रहमान के बारे में कहा कि आज दीनी तालीम देने में सूफ़ी अब्दुर्रहमान साहब के मदरसे में बच्चों को बेहतर दीनी और दुनियावी तालीम दी जा रही है। वहीं शायर ताबिश नैयर ने महफ़िल में ऐसा कलाम पढ़ा कि महफ़िल में धूम मच गई और सभी मेहमान मौलानाओं ने शायर ताबिश नैयर को मंच से सराहा। सूफी अब्दुर्रहमान साहब ने अपनी तकरीर में कहा कि ये जो जलसे किये जाते हैं दअरसल ये मदरसा है जहाँ इल्म हासिल होता है। उर्स की महफ़िल को सजाने में हाजी अमज़द डायमण्ड, कलीम दानिश, आशिफ अंजुम अंसार सहित अनेक मुरीदों का सहयोग रहा।

इसके अलावा हाफ़िज ख़लील रज़ा के निवास पर भी उर्से मुफ्तिऐ आज़म के कुल शरीफ की फातिहा हुई जिसमें स्थानीय लोगों की उपस्थिति रही.
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