जेल में बंद कैदियों से जेलर कौन-कौन से काम नहीं करवा सकते - Madhya Pradesh Jail Rules 1968

किसी भी अपराध में दोषसिद्धि के बाद अपराधी को जेल या कारागार में अपनी सजा भुगतान पड़ता है। जेल में कैदियों के लिए बहुत से नियम होते हैं। वह उन्ही काम को करेगा जो शासन के नियमों में है। अगर उनसे अलग कोई कार्य किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा करवाया जाता है तो यह विधि के विपरीत होगा। आज हम आपको बताएंगे कि किसी कैदी से कोई भी जेल अधीक्षक या जेल का अधिकारी, कर्मचारी घरेलू काम करवाता है या निजी कोई भी काम तब जेल के किस नियम का उल्लंघन माना जायेगा।

पहले नियमावली  समझना आवश्यक है:-

कारागार अधिनियम, 1894 की धारा 59 के द्वारा मिली शक्ति के अनुसार राज्य शासन मध्यप्रदेश जेल नियम, 1968 की नियमावली बनाती है। जिसका पालन करना जेल विभाग के सभी अधिकारियों,कर्मचारियों, कैदियों को करना आवश्यक है।

मध्यप्रदेश जेल नियम, 1968 के नियम क्रमांक 111 की परिभाषा:-

जेल अधीक्षक को जेल में यह देखना चाहिए कि जेल का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी किसी भी कैदियों को जानवरों की देख-रेख पर (जानवर अर्थात निजी पालतू जानवर कुत्ते, बिल्ली, गाय, भैस, घोड़ा आदि) ,किसी भी प्रकार के घरेलू नौकर जैसे कि निजी शौचालय साफ करवाना, पानी भरवाना आदि कार्य नहीं करवाएगा।
 

मध्यप्रदेश जेल नियम, 1968 के नियम क्रमांक 249 की परिभाषा- (कैदियों को निजी कार्य मे नियोजित नहीं किया जाएगा):-

कोई भी जेल का अधिकारी अपने स्वंय के फायदे या लाभ के लिए किसी भी कैदी को किसी निजी काम के लिए नियोजित नहीं करेगा। कोई अधिकारी किसी भी समय बंदी व्यक्ति को सरकार के लाभ या फायदे के लिए और सरकार द्वारा बंदियों के कार्य संबंधित अधिनियम एवं उसके अधीन बनाए गए नियमो के उपबन्धों के कढ़ाई से पालन करने के सिवाय नियोजित नहीं करेगा। (अर्थात जो काम करने के नियम सरकार ने बनाये हैं कैदियों के लिए उनको ही करवाने का अधिकार होगा। न कि स्वंय के फायदे या लाभ के लिए करवाया जाएगा कोई कार्य कैदियों द्वारा जबर्दस्ती।) :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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