ग्वालियर। मध्य प्रदेश में ग्वालियर शहर के जिला अस्पताल मुरार के कोविड वार्ड में लापरवाही की सारी हदें पार हो गई हैं। कोरोना संक्रमित मरीजों के साथ उनके परिजन अस्पताल के वार्ड में रहते हैं। यहां तक कि एक दिन पहले तक तो साथ में खाना भी खाते थे।
एक ही बेड पर सो रहे हैं। दिन भर साथ रहते हैं, एक ही मोबाइल पर लूडो या अन्य गेम्स खेलते हैं। वो भी बिना PPE किट और मास्क के। अस्पताल के जिम्मेदारों की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। न यहां स्टाफ है, न ही कोई देखने वाला। जिला अस्पताल में कुल 150 कोविड बेड हैं। इनमें से 108 ऑक्सीजन बेड हैं। शेष अन्य कॉमन बेड हैं। यहां कोविड पेशेंट की देखभाल के लिए सिर्फ 11 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। नर्सें भी गिनी-चुनी हैं। इसलिए यहां नियमों को ताक पर रखकर अटेंडेंट अपने कोविड पेशेंट के साथ ही रहते हैं।
मुरार के जिला अस्पताल में कोविड वार्ड को देखने पर लगता है कि यह किसी सामान्य से अस्पताल का जनरल वार्ड है। यहां एक बेड पर कोविड पेशेंट के साथ दो से तीन लोग बैठे नजर आते हैं। न तो यह मास्क पहने होते हैं न ही PPE किट। कुछ लोग मास्क पहने भी है तो वह नाक मुंह की जगह नीचे लटक रहा होता है।
मंगलवार तक यहां यह हालात थे कि कोविड पेशेंट और अटेंडेंट एक ही बेड पर बैठकर खाना भी खा रहे थे। हां दोनों की प्लेट अलग होती थी, लेकिन इस समय संक्रमण का कितना खतरा होता है, यह सभी को पता है। उधर सरकार दावा कर रही है कि संक्रमण को रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। सड़कों पर आम लोगों को रोक सकते हैं पर सरकारी अस्पतालों से मुफ्त बंट रहे संक्रमण को कैसे रोक पाएंगे।
वर्जन
यहां परमिशन नहीं है फिर भी लोग मानते नहीं है, इनको बाहर रोकने के लिए गार्ड हैं, लेकिन धमकाकर अंदर चले जाते हैं हमने सुरक्षाकर्मी बढ़ा दिए हैं, साथ ही अटेंडेंट के लिए अलग रूम की व्यवस्था की है
डॉ. विपिन गोस्वामी, जिला अस्पताल मुरार प्रभारी
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