हमने आपको कुछ दिन पूर्व धारा 171-ग की परिभाषा बताई थी जिसमे, अगर कोई निर्वाचन में अभ्यर्थी यह बोलता है कि वह किसी ईश्वर का अवतार है उसे मत नहीं दिया गया तो अनर्थ हो सकता है। तब यह अभ्यर्थी उपर्युक्त धारा के अंतर्गत दोषी होगा। आज का अपराध भी उसी धारा के अपराध का समानरूपी है।
अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले मैसेज एवं वीडियो भेजने वाले के खिलाफ किस धारा के तहत FIR दर्ज होगी
आजकल बहुत से लोग ऐसे फर्जी संदेश, सूचनाएं, पर्चे, या किसी भी प्रकार से प्रचार प्रसार करते हैं कि अगर किसी विशेष धर्म, देवी, देवता, ईश्वर, भगवान आदि का 21 दिन उपवास, या 100 लोगों को ये संदेश, फ़ोटो आदि नहीं भेजोगे तो आपके परिवार का सदस्य मार जाएगा, या रोग से ग्रस्त हो जाएगा। इस तरह के मैसेज लोगों के दिल में दहशत पैदा करते हैं और ज्यादातर लोग नहीं जानते कि ऐसे मैसेज भेजना भारतीय दण्ड संहिता की धारा 508 के अंतर्गत यह अपराध होता है।
भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 508 की परिभाषा (सरल एवं संक्षिप्त शब्दों में):-
अगर कोई व्यक्ति ऐसी सूचनाओं का प्रचार-प्रसार पत्र, संदेश, वीडियो, आदि करेगा की अगर आप किसी विशेष धर्म, ईश्वर, देवी उपासना आदि को नहीं करेगा तो उसकी संतान, परिवार, या आर्थिक संपत्ति आदि को गंभीर क्षति होगी। तब ऐसा करने वाला व्यक्ति धारा 508 के अंतर्गत दोषी होगा।
भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 508 के अंतर्गत दण्ड का प्रावधान:-
इस धारा का अपराध दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 320 की सारणी -1 के अंतर्गत उस व्यक्ति से समझौता योग्य होते हैं जिसे ऐसी सूचनाएं भेजी गई हो। यह असंज्ञेय एवं जमानतीय अपराध होते हैं, इनकी सुनवाई किसी भी मजिस्ट्रेट के पास हो सकती है। सजा- इस अपराध में एक वर्ष की कारावास या जुर्माना या दोनो से दाण्डित किया जा सकता है। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)
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