नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश राज्य के इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोनावायरस से संक्रमित होकर मारे गए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मुआवजे के बारे में बड़ी बात कही है। जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अजीत कुमार की बेंच ने जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान कहा कि मरने वाले कर्मचारियों के आश्रितों को कम से कम 1 करोड़ रुपए मिलना चाहिए।
कर्मचारियों को बिना RTPCR के ड्यूटी के लिए मजबूर किया गया: हाई कोर्ट
उत्तर प्रदेश सरकार ने चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोना से मारे गए लोगों के परिजन को 30-30 लाख रुपए का मुआवजा देने का ऐलान किया था। इस पर हाईकोर्ट ने कहा, 'उम्मीद करते हैं कि राज्य चुनाव आयोग और सरकार मुआवजे की रकम पर फिर से विचार करेंगे और अगली सुनवाई पर इस बारे में हमें बताएंगे।' हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग ने जानबूझकर बिना RT-PCR जांच के कर्मचारियों को ड्यूटी करने के लिए मजबूर किया। ऐसे में परिवार की आजीविका चलाने वाले व्यक्ति की जिंदगी का मुआवजा कम से कम 1 करोड़ तो होना ही चाहिए।'
कई राज्यों में कर्मचारियों की जान से खिलवाड़
उल्लेखनीय है कि केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि भारत के कई राज्यों में सरकारों ने अपने कर्मचारियों की जान से खिलवाड़ किया है। 50 वर्ष से अधिक उम्र वाले और गंभीर बीमारियों से ग्रसित कर्मचारी जिनका इम्यूनिटी सिस्टम काफी कमजोर है, की ड्यूटी लगाई गई। ड्यूटी पर भेजने से पूर्व RT-PCR तो दूर की बात रैपिड एंटीजन टेस्ट भी नहीं करवाया गया। कई राज्यों में कर्मचारियों को COVID की रोकथाम के लिए फ्रंट लाइन पर ड्यूटी पर लगाया गया और उन्हें क्वारंटाइन की सुविधा नहीं दी गई।
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