ग्वालियर के चिड़ियाघर में अब कोरोना संक्रमण को लेकर विशेष सतर्कता, हैदराबाद के चिड़ियाघर मे शेर आ चुके हैं कोरोना संक्रमण की चपेट में

हिमांशु सक्सेना, ग्वालियर (मप्र), NIT:

हैदराबाद के चिडियाघर में शेरों के कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के बाद ग्वालियर के चिडियाघर में अब विशेष सतर्कता बरती जा रही है। कोरोना वायरस संक्रमण के लगातार बढ़ते प्रकोप से हर कोई परेशान है। अभी तक कोविड 19 ने समस्त दुनिया में मानव जाति को परेशान कर रखा था, अब पशु-पक्षी भी उससे सुरक्षित नजर नहीं आ रहे हैं। हैदराबाद में शेरों में संक्रमण के बाद अब पशु-पक्षी और अन्य वन्य प्राणियों को भी इससे खतरा हो गया है। यही वजह है कि भारतीय केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने सभी चिड़ियाघर प्रबंधन को बीते दिनों कोरोना संक्रमण को लेकर दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। वर्तमान में ग्वालियर के चिडियाघर में 2 शेर, 6 टाइगर व लेपर्ड सहित लगभग 500 पक्षी और वन्य प्राणी हैं। इनको कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए चिडियाघर प्रबंधन अब पहले से और अधिक सर्तक हो गया है। चिडियाघर प्रभारी ने बताया कि चिडियाघर में अब केवल कुछ कर्मचारियों को सैनेटाइजेशन करने के बाद ही प्रवेश की अनुमति दी गई है। कर्मचारियों के अलावा सभी का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। हालांकि चिड़ियाघर तो कोविड 19 की गाइड लाइन आते ही दर्शकों के लिए बंद कर दिया गया था।

कोरोना की दूसरी लहर में कर्मचारी अधिक अलर्ट

अधिकारियों ने बताया कि कोरोना संंकृमण को लेकर चिड़ियाघर प्रबंधन पहले ही तेयार था लेकिन कोरोना की दूसरी लहर आते ही चिड़ियाघर में पदस्थ सभी कर्मचारियों को और अधिक अलर्ट रहने के निर्देश बीते दिनों जारी कर दिए गए हैं साथ ही सभी कर्मचारियों को मास्क, ग्लब्स और फेस शील्ड सहित कोरोना से बचाव के संबंधित सामान दिए गए हैं। साथ ही उन्हें कड़ी सख्ती के साथ कहा गया है कि चिडियाघर में प्रवेश और निकास के समय कर्मचारियों को सैनिटाइज करने मास्क व ग्लब्स पहनकर ही अंदर जाए। इतना ही नहीं यहां पशु पक्षी, वन्य प्राणी को देने वाले भोजन पर डॉक्टर निगरानी बनाए हुए हैं। चिडियाघर परिसर और जानवरों व पक्षियों के पिंजरों पर भी सैनिटाइजेशन किया जा रहा है। अधिक खुलापन महसूस कर रहे है। जानवर कोरोना कर्फ्यू के चलते चिड़ियाघर में कर्मचारियों को छोड़कर दिनभर सन्नाटा पसरा रहता है। इससे यहां वन्यप्राणियों को वन जैसा ही महसूस हो रहा है साथ ही वातावरण भी और अधिक शुद्ध हो गया है। चिड़ियाघर में बंदरों की उछल कूद भी और अधिक बढ़ गई है व शेर की दहाड़ सहित अन्य जानवरों की आवाज भी सुनाई देने लगी है।



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