जबलपुर। मध्यप्रदेश के मंडला जिले के नैनपुर के सरकारी स्कूल में कक्षा 11वीं में अध्ययनरत याचिकाकर्ता छात्रों के तर्को से सहमत होकर हाईकोर्ट की जस्टिस सुजय पॉल की सिंगल बेंच ने आदेश दिया है कि विद्यार्थियों ने जिस कोर्स में एडमिशन लिया है, उनकी पढ़ाई जारी रखी जाए। बीच सत्र में कोर्स बंद नहीं किया जा सकता। शिक्षकों की व्यवस्था करना स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है।
माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्यप्रदेश ने बीच सत्र में कोर्स बंद कर दिया था
नैनपुर निवासी अजय झारिया की ओर दायर याचिका में कहा गया कि उसने 10 अगस्त 2020 को शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल नैनपुर में कक्षा 11 वीं में वोकेशनल कोर्स में प्रवेश लिया था। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता निखिल तिवारी ने कोर्ट को बताया कि उसके साथ कुल 10 छात्र है। माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल ने 16 अक्टूबर 2020 को आदेश जारी कर उक्त वोकेशलन कोर्स बंद कर दिया।
एडमिशन के बाद विद्यार्थियों को पढ़ाने से मना नहीं कर सकते: हाई कोर्ट
बताया गया कि वोकेशनल कोर्स को पढ़ाने के लिए स्कूल में शिक्षक नहीं है। मध्य प्रदेश बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन के इस फैसले के खिलाफ विद्यार्थियों ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। विद्यार्थियों की तरफ से उच्च न्यायालय को बताया गया कि वोकेशनल कोर्स बंद होने से छात्रों का साल खराब हो जाएगा। बीच सत्र में ऐसा करना अनुचित ही नही, असंवैधानिक भी है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता छात्रों की पढ़ाई जारी रखने का निर्देश दिया।
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