सर्दी के मौसम में चटपटा खाने का मन करता है। आलू के पराठे की डिमांड अचानक बढ़ जाती है। घर हो या बाजार सर्दी के मौसम में आलू का पराठा ज्यादातर लोगों की पहली पसंद होती है। सवाल यह है कि ठंड के मौसम में आलू के पराठे अच्छे क्यों लगते हैं। इस का साइंटिफिक रीजन क्या है।
रांची यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट एवं आकाशवाणी में सेवाएं दे रहे नूतन प्रसाद बताते हैं कि सर्दी के दिनों में दिन छोटे और रातें लंबी होती है। इसके कारण सूर्य के प्रकाश की उपलब्धता कम हो जाती है। इससे हमारी भूख को नियन्त्रित करने वाले हॉरमोन जैसे- ग्रेलिन, लेप्टिन और ग्लुकोकॉर्टिकोइड्स का स्रवन प्रभावित होता है।
साथ ही हमारे मूड को अच्छा रखने में एक न्यूरोट्रांसमीटर 'सेरोटोनिन' की अहम भूमिका होती है। इसके स्राव की घट-बढ़ भी सूर्यप्रकाश की घट- बढ़ यानी हमारे शरीर में विटामिन डी की मात्रा पर निर्भर करती है। कार्बोहायड्रेट का सेवन करने से सेरोटोनिन का स्राव बढ़ जाता है। अतः हमारा मूड अच्छा हो जाता है। वसा युक्त खाना शरीर को ठंड के मौसम में गर्मी देता है।
सर्दियों में शरीर की उपापचय दर भी प्राकृतिक रूप से बढ़ जाती है और तले- भुने तथा गरिष्ठ भोजन को भी सहज पचा देती है। नतीजा होता है कि हमें भूख अधिक लगती है और मन तले-भुने भोजन- जैसे आलू - मटर के परांठे, मसालेदार- जैसे भरवाँ करेले सह परांठे और मीठा- जैसे 'गर्म गुलाबजामुन' खाने के लिए आतुर हो उठता है। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article
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