मुंबई। महाराष्ट्र राज्य के भंडारा जिले में स्थित सरकारी जिला अस्पताल में चिल्ड्रन वार्ड में अचानक आग लग जाने के कारण 10 मासूम बच्चे जिंदा जल गए। सभी बच्चों की मौत हो गई। बताया गया है कि आग भंडारा जिला अस्पताल के सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में रात 2 बजे लगी।
भंडारा के सिविल सर्जन को पता नहीं अस्पताल में आग क्यों लगी
अस्पताल के सिविल सर्जन प्रमोद खांडते ने बताया कि यूनिट से सात बच्चों को बचाया गया है। अभी आग लगने के कारणों का पता नहीं चला है, लेकिन माना जा रहा है कि शॉर्ट सर्किट के कारण हादसा हुआ होगा। हादसे के बाद परिजन बेहाल हैं। कई लोगों ने अस्पताल में प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं।
भारत के राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री ने भंडारा हादसे पर दुख व्यक्त किया
महाराष्ट्र के भंडारा जिला सामान्य अस्पताल में आग लगने की घटना पर पीएम नरेंद्र मोदी ने भी दुख जताया है। पीएम मोदी ने ट्वीट किया, भंडारा में दिल दहला देने वाली त्रासदी, जिसमें हमने कीमती जिंदगियों को खो दिया है। पीड़ित परिवारों के प्रति मेरी संवेदना है।
वहीं राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने लिखा, महाराष्ट्र के भंडारा में हुए अग्नि हादसे में शिशुओं की असामयिक मृत्यु से मुझे गहरा दुख हुआ है। इस ह्रदय विदारक घटना में अपनी संतानों को खोने वाले परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट किया, महाराष्ट्र के भंडारा ज़िला अस्पताल में लगी आग दुर्घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं। भगवान उन्हें इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति दे।
भंडारा कांड: हादसा या गैर इरादतन हत्या
महाराष्ट्र के भंडारा जिला चिकित्सालय में चिल्ड्रन वार्ड में लगी आग एक हादसा है या फिर इसे गैर इरादतन हत्या कहा जाना चाहिए। सरकारी अस्पताल में व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के लिए पर्याप्त स्टाफ और बजट होता है। यदि आग का कारण शार्ट सर्किट है तो निश्चित रूप से इस बात की जांच की जानी चाहिए कि अस्पताल की बिजली लाइन की मरम्मत कितने समय से नहीं हुई थी। सामान्यतः इसे प्रशासनिक लापरवाही कहा जाता है परंतु यदि किसी व्यक्ति की लापरवाही, किसी दूसरे व्यक्ति की मृत्यु का कारण बने दो भारतीय दंड संहिता में इसे अपराध माना गया है। ऐसे व्यक्ति को बर्खास्त करके जेल भेजना चाहिए।
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