भोपाल। केंद्र के साथ प्रदेश सरकार ने विश्व महामारी कोविड-19 के चलते कर्मचारियों के आर्थिक स्वत्वों को स्थगित कर रखा है। मप्र तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष श्री प्रमोद तिवारी एवं प्रांतीय उपाध्यक्ष कन्हैयालाल लक्षकार ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि महामारी में लाकडाउन के कारण शहरों से लौटते मजदूरों की दुर्दशा से विचलित कई दाताओं व कर्मचारियों ने मदद का हाथ बढ़ाकर संवेदनशीलता प्रकट की थी। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने देय जनवरी 2020 से 4 फीसदी डीए डीआर जुलाई 2020 से नियमित इंक्रीमेंट व प्रति छः माह में मिलने वाले डीए डीआर को भी जुलाई 2021 तक स्थगित कर दिया था।
प्रदेश सरकार ने दो कदम आगे चलकर उक्त स्वत्वों के साथ सातवें वेतनमान के एरियर की अंतिम किश्त का 75% भाग के साथ जुलाई 2019 से देय पांच फीसदी डीए डीआर आदेश बावजूद स्थगित कर दिया। नवीन शिक्षक संवर्ग को जुलाई 2018 से 16 माह का देय सातवें वेतनमान के एरियर पर चुप्पी साध रखी है। महामारी से देश लाकडाउन से अनलाक की ओर लौट गया है। अर्थव्यवस्था पुनः पटरी आ रही है। आश्चर्य है कि उक्त अवधि में माननीयों के ठाट-बाट बरकरार रहे यहाँ तक कि आयकर का भुगतान सरकारी खजाने से किया गया। जुलाई 2021 तक कर्मचारियों को रोके गये लगभग 30 फीसदी अरबों रुपयों के आर्थिक स्वत्वों की प्रतिपूर्ति होना चाहिए। इसकी भरपाई आगामी बजट में परिलक्षित होना चाहिए।
जुलाई 2019 से जुलाई 2021 तक के लिये चालू मूल्यसूचकांक के आधार पर प्रति छः माह में देय डीए डीआर 5+4+4+4+4 कुल 21 व दो नियमित वार्षिक वेतनवृद्धि 3+3=6 फीसदी की दरकार है। वर्तमान में डीए डीआर केंद्र में 17 व राज्य में 12 फीसदी के मान से भुगतान हो रहा है। माननीयों ने अपने हितों को साधकर जनता व कर्मचारियों को आर्थिक बदहाली में छोड़ दिया है। अब समय आ गया है कि आगामी बजट में उक्त प्रावधान होना चाहिए।
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