भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा उपचुनाव 2020 की वोटिंग शुरू हो चुकी है। कुछ ही समय बाद एग्जिट पोल भी आ जाएंगे। स्थिति लगभग साफ हो चुकी है और समीक्षाओं का दौर भी शुरू हो गया है। यदि कांग्रेस पार्टी की बात करें तो मध्यप्रदेश में कमलनाथ का प्रचार करने के लिए सचिन पायलट को छोड़कर कोई नहीं आया। राहुल गांधी नाराज थे, प्रियंका गांधी का गुस्सा भी समझ में आता है परंतु कमलनाथ के प्रिय मित्र और पुराने साथी राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत क्यों नहीं आए। इसके अलावा भी बहुत सारे नाम है।
चुनाव से पहले कांग्रेस ने स्टार प्रचारकों की एक लंबी-चौड़ी लिस्ट जरूर जारी की, लेकिन कुछ ही बड़े नेता प्रचार के लिए पहुंचे। जिनमें छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल और सचिन पायलट ने तो प्रचार किया बाकि बड़े नेताओं का ज्यादा समय पार्टी को नहीं मिल पाया। कमलनाथ ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मुकुल वासनिक, कमलनाथ, अशोक गहलोत, भूपेश बघेल, दिग्विजय सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू, सचिन पायलट, अशोक चव्हाण, रणदीप सुरजेवाला, कांतिलाल भूरिया, सुरेश पचौरी, अरुण यादव, विवेक तन्खा, राजमणि पटेल, अजय सिंह, आरिफ अकील, सज्जन सिंह वर्मा, जीतू पटवारी, जयवर्धन सिंह, प्रदीप जैन, लाखन सिंह यादव, गोविंद सिंह, नामदेव दास त्यागी, आचार्य प्रमोद कृष्णम, साधना भारती, आरिफ मसूद, सिद्धार्थ कुशवाहा और कमलेश्वर पटेल के नाम घोषित किए थे।
इनमें से राहुल गांधी कमलनाथ के बयान से नाराज हो गए। कमलनाथ ने राहुल गांधी के बयान को उनका निजी बयान बताया तो प्रियंका गांधी ने भी उपचुनाव को कमलनाथ का निजी चुनाव मान लिया और नहीं आई। कमलनाथ की मित्र मंडली में से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल थोड़े समय के लिए आए जैसे औपचारिकता पूरी करने आए हो। नवजोत सिंह सिद्धू का नाम तो लिस्ट में ही रह गया। राहुल गांधी की टीम के सचिन पायलट ने आकर प्रचार किया परंतु कमलनाथ के प्रिय मित्र और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत नहीं आए। थोड़ा क्लासिफिकेशन करें तो समझ में आता है कि कांग्रेस पार्टी ने इस चुनाव में कमलनाथ को अकेला छोड़ दिया था।
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