हाथरस कांड: कोर्ट ने पूछा, यदि वह अमीर लड़की होती तब भी क्या शव को इस तरह जलाते?



हाथरस केस में पीड़ित परिवार ने आज हाईकोर्ट से शिकायत की कि ना तो उन्हें अपनी बेटी का मुंह देखने दिया गया...और न ही अंतिम संस्कार करने दिया. अफसरों की दलील थी कि लॉ एंड ऑर्डर खराब न हो इसलिए ऐसा किया गया.कोर्ट ने पूछा कि क्या वह किसी अमीर आदमी की बेटी होती तो भी उसे इस तरह जला देते? 

कोर्ट को तय करना है कि क्या सरकारी तंत्र ने पीड़ित लड़की और उसके परिवार के मौलिक अधिकारों का हनन किया? अगली सुनवाई दो नवंबर को होगी. हाथरस के पीड़ित परिवार के पांच लोग आज इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में पहुंचे. हाईकोर्ट ने पीड़ित लड़की के देर रात अंतिम संस्कार करने के मामले का खुद संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की है. 

पीड़ित पक्ष की वकील सीमा कुशवाहा ने कहा कि "कोर्ट का कहना है कि अगर पीड़ित परिवार की जगह कोई बहुत ही रिच पर्सन होता तो क्या इस तरीक़े से आप जला देते. चूंकि कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है, इसलिए पूरा सेंसिटिव होकर सुन रहा है." इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लड़की के अंतिम संस्कार के मामले का खुद संज्ञान लेकर इस पर सुनवाई का आदेश दिया था. कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा था कि वह इस बात का परीक्षण करना चाहती है कि क्या यह पीड़ित लड़की और उसके परिवार के मौलिक अधिकार और मानवाधिकार का उल्लंघन है? क्या सरकारी अमले ने लड़की की गरीबी और उसकी जाति की वजह से उसके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया? क्या अंतिम संस्कार में सनातन हिंदू धर्म की रीतियों का पालन हुआ? क्या सरकारी अमले ने यह सब “दामन पूर्वक”, “गैर क़ानूनी तौर पर” और “मनमाने” ढंग से किया?




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