भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान चुनावी सभाओं में लगातार दोहरा रहे हैं कि बजट में कमी के कारण किसी को परेशानी नहीं होने दूंगा, वहीं दूसरी ओर बिना किसी गलती के मध्यप्रदेश शासन की सेवा कर रहे 60,000 कंप्यूटर ऑपरेटरों को बजट के नाम पर नौकरी से निकालने की प्रक्रिया लगातार जारी है। पंचायत एवं मंडी के 5200 कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवाएं समाप्त करने के बाद अब शिक्षा विभाग के 6000 कंप्यूटर ऑपरेटरों की सेवा समाप्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
बता दें कि अलग-अलग विभागों में करीब 60 हजार से ज्यादा कंप्यूटर ऑपरेटर्स काम कर रहे हैं। इससे पहले भी जिला-जनपद पंचायत, मंडी बोर्ड से कंप्यूटर ऑपरेटर्स को हटाया गया है। पंचायतों में करीब 2200 वहीं कृषि मंडियों के 3 हजार से ज्यादा ऑपरेटर निकाले जा चुके हैं। अब शिक्षा विभाग के करीब 6000 कंप्यूटर ऑपरेटरों की सेवाएं समाप्त की जाएंगी।
सरकारी नौकरी का कार्यक्रम दिखाकर वोट जुटाने की रणनीति
मध्य प्रदेश के तमाम सरकारी विभागों में करीब 500000 पद रिक्त हो गए हैं। आबादी के साथ विभागों में पदों की संख्या बढ़नी चाहिए थी परंतु एक कर्मचारी के रिटायर होने के साथ ही उसका पद भी समाप्त जैसा होता जा रहा है। सालों से नई भर्तियां नहीं हुई है। 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन किया था और 2020 में विधानसभा उपचुनाव से पहले पुलिस भर्ती का केवल कार्यक्रम जारी किया गया है, जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि एक निर्धारित तारीख यानी चुनाव के बाद कार्यक्रम बदला जा सकता है।
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