गहलोत के जाल में फंस गए पायलट, कॉल डिटेल और रिकॉर्डिंग ने बढ़ाई मुसीबत


राज्यसभा चुनाव के दौरान ही कांग्रेस में बगावती स्वर उठने लगे थे। तब अशोक गहलोत ने विधायकों को रिसॉर्ट में भेजकर कांग्रेस को नुकसान से बचाते हुए दोनों सीटें जीतने में कामयाबी हासिल की थी। इसके बाद गहलोत ने विधायकों की खरीद फरोख्त की कोशिशों की जांच करने का जिम्मा एसओजी को सौंपा।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार गहलोत ने चुनाव में जीत के बाद भी तह में जाने और बगावती विधायकों की खोज का काम जारी रखाया। इसके तहत करीब दस विधायकों के काल डिटेल और रिकार्डिंग भी जुटाई गई है। गहलोत ने इस पूरी प्रक्रिया में पायलट की भूमिका की जानकारी केंद्रीय नेतृत्व को भी बताई थी। यही कारण है कि सचिन बीते एक सप्ताह से दिल्ली में बड़े नेताओं से मिलकर विधायकों के साथ हो रहे बर्ताव की बात कहते घूम रहे हैं लेकिन कांग्रेस नेतृत्व से समय नहीं मिला।

राजस्थान में गिरफ्तार भाजपा नेता भरत मलानी और अशोक सिंह के गिरफ्तार होते ही कांग्रेस में बगावत खुलकर सामने आ गई। सचिन पायलट को इस बात की भनक थी। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार एसओजी को भाजपा के एक वरिष्ठ नेता जो पायलट की बिरादरी के हैं उनसे जुड़े कुछ सबूत भी जुटाएं हैं। वहीं खरीद फरोख्त के तार विदेश से भी जुड़ते दिख रहे हैं।
(न्यूज़ सोर्स: अमर उजाला)


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