दिनांक 1 जुलाई 2020 से आगामी 148 दिनों के लिए सभी प्रकार के शुभ कार्य (विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, शुभारंभ आदि) वर्जित हो गए हैं। पंचांग के अनुसार श्री हरि विष्णु शयन के लिए क्षीर सागर चले गए हैं। आमतौर पर यह अवधि 4 महीने की होती है इसलिए इसे चातुर्मास कहा जाता है परंतु इस साल भी यह अवधि 5 महीने (148 दिन) की होगी।
2020 में कब से कब तक शुभ कार्य वर्जित रहेंगे
ज्योतिर्विद् देवेंद्र कुशवाह के मुताबिक चातुर्मास में इस बार दो अश्विन मास होने से चार महीने रहने वाला चातुर्मास पांच महीने का होगा। यह एक जुलाई से 25 नवंबर (देवउठनी एकादशी) तक 148 दिन रहेगा। इस बार अधिकमास होने से तीज-त्योहार पिछले साल के मुकाबले 20 से 25 दिन आगे खिसकेंगे।
आचार्य शिवप्रसाद तिवारी के अनुसार चातुर्मास का समय भगवान विष्णु के शयनकाल का होता है। पुराणों के अनुसार इस दौरान विवाह सहित कई मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं। देवउठनी ग्यारस पर भगवान के निद्रा से जागने के बाद मांगलिक कार्यों की शुरुआत दोबारा होती है।
तीन साल में एक बार आता है पुरुषोत्तम मास
पं. ओम वशिष्ठ ने बताया कि इस बार चातुर्मास में आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, अश्विन (प्रथम), अश्विन (द्वितीय) और कार्तिक मास होंगे। पहला अश्विन मास 3 सितंबर से एक अक्टूबर और दूसरा 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक रहेगा। इस वर्ष अधिकमास या पुरुषोत्तम मास 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक रहेगा।
अधिक मास/ पुरुषोत्तम मास क्या होता है, क्यों आता है
हिंदू पंचांग में एक माह में कृष्ण व शुक्ल पक्ष होते हैं। इसमें तिथियों की घट-बढ़ होती है। सूर्य वर्ष 356 और चंद्र वर्ष 354 दिन का होता है। एक साल में 11 दिन का अंतर आता है और लगभग 32 माह 16 दिन बाद एक माह बढ़ जाता है। सूर्य और चंद्र के बीच संतुलन बनाने के लिए तीन वर्ष में अधिकमास का समावेश किया गया है। इससे साल में एक महीने की वृद्धि हो जाती है।
चातुर्मास के बाद ये हैं विवाह मुहूर्त
नवंबर 25, 26, 30
दिसंबर 1, 2, 7, 8, 9 और 11
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