लाॅक डाउन में फ्री सर्विस देना वाला गरीब परिवार का जुनून युवक है बाबू कुरैशी, पुलिस, नगर निगम, मीडिया कर्मी, डाॅक्टरों व समाजसेवकों की काॅल पर घर-घर पहुंच कर निःशुल्क सेवाएं देता है यह समाजसेवी युवक

संदीप शुक्ला, ब्यूरो चीफ, ग्वालियर (मप्र), NIT:

विश्वव्यापी कोविड 19 महामारी को रोकने के लिए लगाये गये लॉकडाउन में जहां अनेक समाजसेवी संस्थाएं अपने-अपने स्तर पर लोगों की मदद कर रही हैं वहीं मध्यप्रदेश के ग्वालियर में एक पच्चीस वर्षीय युवक आटो मिस्त्री बाबू कुरैशी पुलिस, डाॅक्टर, मीडिया, नगर निगम सहित आमजनों के फोन पर सूचना मिलते ही घर -घर पहुंचकर अपनी नि:शुल्क सेवाएं देकर समाजसेवा का कार्य कर रहा है।

यही नहीं बल्कि बाबू कुरैशी ने नई सड़क पर अपने कुछ साथियों के साथ रक्तदान (प्लाज्मा दान) भी किया। कुरैशी ने इस संवाददाता को बताया कि उसके रक्तदान करने वालों में उसके अलावा मुस्लिम समाज के मोहम्मद यूसुफ अब्बास, सैयद गालिब अली, शमीम खान आदि ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए रक्तदान (प्लाज्मा) किया है जो सराहनीय कार्य है।

वैसे तो कुरैशी साधारण परिवार का है लेकिन उसमें बिना किसी भेदभाव के समाजसेवा की भावना कूट-कूट कर भरा हुआ है। वह एक सेमिनार नूरगंज में छोटी सी आटो मिस्त्री के नाम से दुकान चलता है। वह छोटे वाहन से लेकर बडे-बडे वाहनों को ठीक कर लेता है।
उसने बताया कि शहर में जब से कोरोना महामारी के चलते लाकडाउन लगा है तब से वह पुलिस विभाग से लेकर डाक्टर, मीडिया, नगर निगम तथा जो भी समाजसेवा में लगा हुआ है उनके वाहनों को बिना शुल्क लिए ठीक करता है। जब कोई जबरन कुछ देता है तो वह उनका मन रखने के लिए रख भी लेता है।

उसने अपनी दुकान पर बड़े बैनर पर भी पर लिख रखा है कि यदि किसी का वाहन खराब है तो वह घर पहुँचकर ठीक करेगा जिसका वह कोई भी पैसा नहीं लेगा। वह अभी तक सूचना प्राप्त होने पर लोगों के घर घर पहुंचकर अनेक वाहन ठीक कर चुका है। जब उससे पूछा गया कि आप पैसा क्यों नहीं लेते हैं तो उसका जबाव था कि इस भयंकर संकट में मैरा जमीर गवारा नहीं करता कि मैं पैसे लूं, पैसा तो बाद में भी कमाया जा सकता है, कुछ इंसानियत भी होनी चाहिए।



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