भारत की गिरती अर्थव्यवस्था का असर अब डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन पर भी दिखने लगा है। पिछले 20 वर्षों में पहली बार भारत डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन सबसे खराब स्थिति में पहुंच गया है।
हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा वर्ष में कॉर्पोरेट और इनकम टैक्स करेक्शन में भारी गिरावट दर्ज की गई है।रिपोर्ट में पीएम मोदी के डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन के लक्ष्य को भी बड़ा झटका लगा है।
पीएम मोदी ने चालू वित्त वर्ष के अंत तक यानी 31 मार्च तक भारत का डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन का लक्ष्य 13.5 ट्रिलियन रुपये (189 बिलियन डॉलर) रखा था। पीएम मोदी का यह लक्ष्य पिछले वर्ष के डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन से भी 17 प्रतिशत ज्यादा था।
डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में 20 साल में पहली बार आई खराब स्थिति की वजह आर्थिक सुस्ती और कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती को भी बताया है। जानकारों की माने तो पिछले कुछ वर्षों में बाजार में डिमांड की कमी देखी जा रही है। इसकी वजह कंपनियों के निवेश में कटौती और बढ़ती बेरोजगारी को बताया गया है।
सरकार और बाकी वित्तीय संस्थाओं ने खुद इस बात को कबूल किया है कि भारत की विकास दर आने वाले समय में 5 फीसदी रहने वाली है जो कि पिछले 11 वर्षों में सबसे कम है।
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