बवासीर जिसे अंग्रेजी भाषा में पाइल्स कहा जाता है. बवासीर एक खतरनाक बीमारी है. बवासीर के मुख्यतः दो प्रकार होते हैं एक खूनी बवासीर और दूसरा बादी बवासीर. आमतौर पर देखा गया है कि बवासीर 40 से 60 साल की उम्र में होता है. लेकिन यह इससे पहले भी हो सकता है. बवासीर की बीमारी अनुवांशिक भी हो सकती है जो घर में पीढ़ियों से चली आ रही हो.
खुजली इसका प्रमुख लक्षण है और मलाशय में कुछ अटकने का अहसास होना. जिन्हें बादी बवासीर होती है उन्हें काले रंग के मस्से होते हैं. जिन्हें बाबासीर होती है दर्द और जलन यह दो प्रमुख लक्षण है. नित्य क्रिया करते समय मस्सों का बाहर आना, कई बार यह स्वयं ही अंदर की ओर चले जाते हैं. लेकिन कई बार मस्सों को धकेलना पड़ता है. टॉयलेट करते समय रक्त स्राव हो जाता है. यह कभी बूंद बूंद तो कभी धार में प्रवाह होता है.
इसके अलावा कुछ निम्न लक्षण भी बवासीर रोगियों में देखे गए हैं.
- खुजली इसका प्रमुख लक्षण है और मलाशय में कुछ अटकने का अहसास होना.
- जिन्हें बादी बवासीर होती है उन्हें काले रंग के मस्से होते हैं.
- जिन्हें बाबासीर होती है दर्द और जलन यह दो प्रमुख लक्षण है.
- नित्य क्रिया करते समय मस्सों का बाहर आना, कई बार यह स्वयं ही अंदर की ओर चले जाते हैं. लेकिन कई बार मस्सों को धकेलना पड़ता है.
- टॉयलेट करते समय रक्त स्राव हो जाता है. यह कभी बूंद बूंद तो कभी धार में प्रवाह होता है.
बवासीर होने से 1 महीने पहले शरीर देता है यह संकेत-
- गुदा में खुजली होना.
- अपच की समस्या होना.
- मल से भयंकर बदबू का आना.
- मल त्याग की बार-बार इच्छा होना और दिन में कई बार शौच जाना.
- गुदा पर ज्यादा पसीना आना.
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